सदमे से किसानों के मरने का सिलसिला जारी है। बेमौसम बारिश से गेहूं की फसल बर्बाद होने के सदमे में दो और किसानों की मौत हो गई। परिवार वालों ने शवों का पोस्टमार्टम नहीं कराया है। अब तक जिले में 30 किसानों की मौत हो चुकी है। छह ने फांसी लगाकर जान दी और एक किसान ने जहर खाकर मौत को गले लगा दिया।
दातागंज तहसील क्षेत्र के गांव सिसैया किशन में किसान कड्ढे (68) पुत्र तोताराम की सदमे से मौत हो गई। कड्ढे ने दस बीघा जमन में गेहूं की फसल की थी। शनिवार को उन्होंने गेहूं निकलवाए। दस बीघा खेत में सिर्फ आठ पीपा गेहूं निकले। उन पर पीएनबी डहरपुर का 1.50 लाख रुपया कर्जा है। फसल बर्बाद होने के सदमे को वह झेल नहीं सके। उनकी हालत बिगड़ी और कुछ देर में ही मौत हो गई। हालांकि तहसील प्रशासन का कहना है कि पिछले दिनों कढ्डे को 4500 रुपये का मुआवजा मिल चुका है, लेकिन उनके परिवार वाले मुआवजा मिलने की बात से इंकार कर रहे हैं। किसान की मौत के बारे में एसडीएम ओपी तिवारी ने लेखपाल और कानूनगो से जानकारी हासिल की है।
बिसौली कोतवाली क्षेत्र के गांव भरतपुर निवासी कल्लू (45) भूमिहीन किसान हैं। उन्होनें गांव के ही हरिद्वारी की छह बीघा जमीन बंटाई पर ली थी। इसमें गेहूं की फसल थी। बारिश में फसल बर्बाद हो गई। रविवार दोपहर कल्लू खेत में गेहूं की कटाई करने पहुंचे। बर्बाद फसल देखकर खेत पर ही उनकी हालत बिगड़ गई। कुछ ही देर में कल्लू की मौत हो गई। सूचना मिलने पर एसडीएम गुलाब चंद्र ने गांव पहुंच कर जानकारी ली। कल्लू के पास दस बीघा जमीन थी। यह जमीन बेच कर वह अपनी दो बेटियों की शादी कर चुके हैं। उनके तीन अविवाहित बेटे हैं। कल्लू बंटाई पर जमीन करते अपना परिवार पालते हैं। एसडीएम ने उनके परिवार वालों को आर्थिक सहायता दिलाने की बात कही है।