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Budaun News: ट्रक खा रहे जंग, बिना प्रशिक्षण जारी किए जा रहे प्रमाणपत्र

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लाइसेंस बनवाने वालों को ट्रेनिंग देने के लिए खड़े ट्रक खा रहे जंग।संवाद
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बदायूं। भारी वाहन का लाइसेंस जारी किए जाने से पहले 28 दिन तक ट्रेनिंग लेनी होती है उसके बाद प्रमाणपत्र मिलने का प्रावधान है। तब कहीं जाकर हैवी पब्लिक सर्विस लाइसेंस जारी होता है, लेकिन जिले में सब कुछ उलटा है। यहां प्रशिक्षण देने के लिए खरीदे गए ट्रक व अन्य वाहन खड़े-खड़े जंग खा रहे हैं। उनके पहिये महीनों से हिले तक नहीं हैं।
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बावजूद इसके लाइसेंस बनवाने वालों को प्रमाणपत्र लगातार जारी किए जा रहे हैं। आरोप है कि इसके बदले में छह से आठ हजार रुपये लिए जाते हैं। यह हम नहीं बल्कि जिन लोगों ने लाइसेंस बनवाए हैं उनका कहता है। बिना प्रशिक्षण बस व ट्रक चलाने वाले कैसे चालक होंगे, इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।
जिले से 15 लाइसेंस हर रोज हैवी पब्लिक सर्विस के बन रहे हैं। लाइसेंस बनने के बाद कोई ट्रक चलाएगा कोई बस तो कोई कोई तो रोडवेज की बसों को भी चलाने का काम करेगा। जिले में हादसों की बात करें तो प्रदेश में टॉप 20 में जिला शामिल है। इसकी यही वजह है कि यहां लाइसेंस नियमों को दरकिनार कर बनाने का काम किया जा रहा है।
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जिले में पांच निजी स्कूल देते हैं प्रमाणपत्र
जिले में पांच प्राइवेट स्कूल ऐसे हैं जो लाइसेंस बनवाने से पहले प्रमाणपत्र जारी कर रहे हैं। स्कूल संचालक अधिकारियों से सांठगांठ कर मनमानी कर रहे हैं। बिना प्रशिक्षण दिए ही लाइसेंस जारी करने वाला प्रमाण पत्र जारी करते आ रहे हैं।

ट्रकों के नहीं हिलते हैं पहिये
प्रशिक्षण के नियमों के मुताबिक, स्कूल संचालक लाइसेंस बनवाने वाले अभ्यर्थी को हर रोज 10 से 12 किलोमीटर तक ट्रक, डीसीएम या जिस किसी वाहन के लाइसेंस की डिमांड की गई है, वह वाहन चलवाकर देखता है। नौसिखिये कई बार वाहन को भिड़ा भी देेेते हैं, लेकिन यहां तो ट्रकों की हालत देखकर ही साफ हो रहा है कि उनके पहिये महीनों से हिले तक नहीं हैं।

-लोगों का आरोप- आठ हजार लेकर थमा देते हैं प्रमाणपत्र-
चार नवंबर को एआरटीओ से हमने अपना हैवी पब्लिक सर्विस लाइसेंस बनवाया है। प्रशिक्षण देने वाले स्कूल से प्रमाणपत्र दिया गया, लेकिन एक भी दिन प्रशिक्षण नहींं हो सका। प्रमाणपत्र देने के नाम पर आठ हजार रुपये लिए गए हैं। इसी तरह से जो भी लोग लाइसेंस बनवा रहे हैं, किसी को प्रशिक्षण नहीं दिया जा रहा है। ऐसे में चालक कैसे ठीक से वाहन चलाएंगे। -कृष्णपाल सिंह राठौर


12 हजार में दे दिया लाइसेंस बनवाने का ठेका
दातागंज के बराई गांव निवासी हैं। वह चंडीगढ़ में डीसीएम चलाते हैं। लाइट का लाइसेंस था। हैवी पब्लिक सर्विस लाइसेंस बनवाया है। हम रोजाना भागदौड़ नहीं कर सकते, इसके लिए एक व्यक्ति काे लाइसेंस बनवाने के 12 हजार रुपये दिए हैं। कहीं कोई प्रशिक्षण नहीं कराया गया है। बताया कि दस दिन में लाइसेंस घर पहुंच जाएगा। हमको तो कंप्यूटर के सामने एक बार जाना पड़ा है। इसके अलावा कुछ नहीं किया है। -सुरेंद्र

प्रमाणपत्र देने की जिम्मेदारी प्राइवेट स्कूलों की है। नियम है कि लाइसेंस बनवाने वाले को 28 दिनों तक प्रशिक्षण देने के बाद ही प्रमाण पत्र जारी किया जाता है। अगर बिना प्रशिक्षण के ही प्रमाण पत्र जारी किए जा रहे हैं तो गलत है। इस मामले की जांच कर कार्रवाई करेंगे। - रामबचन गुप्ता, एआरटीओ प्रशासन
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