सूबे के कैबिनेट मंत्री आजम खां के खिलाफ देशद्रोह के मामले में गुरुवार को सीजेएम कोर्ट में वादी के बयान दर्ज हो गए। कोर्ट ने सुनवाई के लिए अगली तारीख 20 नवंबर मुकर्रर की है। कानून के जानकारों की मानें तो देशद्रोह के इस मामले में कोर्ट आजम खां को तलब कर सकता है।
आजम खां के खिलाफ बजरंग दल के जिला संयोजक उज्ज्वल गुप्ता ने 2011 में देशद्रोह का मामला दर्ज कराया था। प्रदेश में सपा की सरकार बनने के बाद मई 2012 में पुलिस ने मामले में एफआर लगा दी। उज्ज्वल गुप्ता के प्रोटेस्ट पर कोर्ट ने एफआर खारिज कर पुर्नविवेचना का आदेश दिया था। 10 अगस्त 2015 को वादी ने कोर्ट में धारा 190 (2) के तहत अर्जी देकर आजम को तलब करने की मांग की थी। इस दौरान कोर्ट ने एसएसपी से पूरे मामले पर रिपोर्ट तलब की। पुलिस ने फिर से एफआर दाखिल कर दी थी। 22 अक्तूबर को सुनवाई के बाद कोर्ट ने मामले में वादी के बयान दर्ज कराने को 26 अक्तूबर मुकर्रर की थी। इसके बाद कोर्ट में वादी के बयान दर्ज होने थे।
इस दौरान कई वजहों से वादी के बयान दर्ज नहीं हो सके। कोर्ट ने तीन नवंबर को सुनवाई के दौरान वादी उज्ज्वल गुप्ता के बयान दर्ज करने के लिए पांच नवंबर की तारीख मुकर्रर की थी। गुरुवार को सीजेएम कोर्ट में उज्ज्वल गुप्ता के बयान दर्ज करने के बाद कोर्ट ने सुनवाई के लिए 20 नवंबर निर्धारित कर दी है।
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ये कहा था आजम ने
- केंद्र सरकार में केवल एक ही मुस्लिम मंत्री गुलाम नबी आजाद हैं। वह भी कश्मीर का है। जिसको लेकर यह विवाद है कि वह हिंदुस्तान का हिस्सा है या नहीं। हिंदुस्तान का भूगोल ही तय नहीं है। केंद्र सरकार के मंत्री गुलाम नबी आजाद को तो यह भी पता नहीं होगा कि बदायूं बिहार में है या कोलकाता में।
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ये कहना था बजरंग दल नेता उज्जवल का
- आजम खां ने 125 करोड़ भारतवासियों की भावनाओं को ठेस पहुंचाई है। कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है। आजम ने भारत की अखंडता को ठेस पहुंचाकर लाखों अमर शहीदों और देश भक्तों की भावनाओं का आहत किया है। इस कृत्य के लिए आजम खां को सजा मिलनी चाहिए।