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Budaun News: छह साल वेतन लिया, नहीं किया एक भी पोस्टमार्टम

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बदायूं। राजकीय मेडिकल कॉलेज की फॉरेंसिक विभागाध्यक्ष छह साल से वेतन पा रही हैं, लेकिन ताज्जुब की बात यह है कि उन्होंने इस अवधि में एक भी पोस्टमार्टम नहीं किया। सिस्टम में खामी की यह शिकायत मुख्यमंत्री से भी की जा चुकी है। सुनवाई न होने पर डॉक्टर की तैनाती पर सवाल उठने लगे हैं।
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वजीरगंज के कल्लू सिंह ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर की शिकायत में कहा है कि मेडिकल कॉलेज में फॉरेंसिक विभाग बना तो उसके विभागाध्यक्ष की तैनाती की गई। विभागाध्यक्ष का काम होता है कि पोस्टमार्टम हाउस पर छात्रों को अभ्यास कराना व शवों का पोस्टमार्टम करना। बड़े ही ताज्जुब की बात है कि विभागाध्यक्ष इन छह सालों में पोस्टमार्टम हाउस तक तैयार नहीं करा सकीं, न ही इस अवधि में उन्होंने कोई पोस्टमार्टम ही किया। हालांकि वेतन बदस्तूर पा रही हैं। यहां बता दें कि पहले जनप्रतिनिधि भी पोस्टमार्टम हाउस न बनने और पोस्टमार्टम न होने की शिकायत मुख्यमंत्री से कर चुके हैं।


जिला मोर्चरी तक नहीं गईं विभागाध्यक्ष

भले ही मेडिकल कॉलेज में पोस्टमार्टम हाउस नहीं बना है, लेकिन छह साल में एक भी बार किसी मौत की सही वजह बताने के लिए उनकी ड्यूटी पोस्टमार्टम हाउस पर नहीं लगाई गई। जिले की सीएचसी पर तैनात डॉक्टर पोस्टमार्टम करने आ रहे हैं, लेकिन मेडिकल कॉलेज से विभागाध्यक्ष एक भी पोस्टमार्टम करने जिला मोर्चरी नहीं गईं।
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साल में एक भी विद्यार्थी नहीं पहुंचा जिला पोस्टमार्टम हाउस
जिनके मां-बाप करोड़ों रुपये खर्च कर अपने बच्चे को एमबीबीएस कराने के लिए मेडिकल कॉलेज भेज रहे हैं उनको यह तक पता नहीं कि उनके बच्चे को पढ़ाया क्या जा रहा है। पांच साल में मात्र तीन से चार बार ही विद्यार्थियों को पोस्टमार्टम हाउस भेजा गया है, जिसका रिकॉर्ड पोस्टमार्टम हाउस पर मौजूद है। पिछले एक साल से एक भी विद्यार्थी जिला पोस्टमार्टम हाउस नहीं पहुंचा है।



पूरे मामले में जानकारी देने के लिए प्राचार्य मौजूद हैं। हम किसी दूसरे को अपना पक्ष नहीं दे सकते। इसके लिए प्राचार्य से ही बात करनी होगी।- डॉ. नेहा यादव, विभागाध्यक्ष फॉरेंसिक विभाग


पोस्टमार्टम की ड्यूटी सीएमओ कार्यालय से लगाई जाती है। अगर फॉरेंसिक विभागाध्यक्ष की ड्यूटी लगती तो वह जरूर जातीं। मेडिकल कॉलेज में अभी पोस्टमार्टम हाउस व मोर्चरी नहीं है। छात्रों को पोस्टमार्टम की प्रक्रिया से गुजरना होता है, इसके लिए समय-समय पर उन्हें जिला पोस्टमार्टम हाउस भेजा जाता है। - डाॅ. अरुण कुमार, प्राचार्य राजकीय मेडिकल कॉलेज
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