बदायूं। शराब के अधिक सेवन से लिवर फेल हो रहे हैं। वहीं हेपेटाइटिस के मरीजों में लगातार इजाफा हो रहा है। जिला अस्पताल से तीन माह में तीन हजार मरीजों के सैंपल हेपेटाइटिस की जांच के लिए लखनऊ भेजे गए। सभी पॉजिटिव आए हैं। इसमें दो हजार केस हेपेटाइटिस सी और एक हजार हेपेटाइटिस बी के हैं। हेपेटाइटिस सी के 150 मरीजों ने स्वीकार किया कि उनकी यह हालत ज्यादा शराब पीने से बिगड़ी है।
जिले में गैस्ट्रो इंट्रोलॉजी विभाग मेडिकल कॉलेज में नहीं है। ऐसे में लिवर फेल मरीजों को रेफर किया जा रहा है। लिवर फेल होने की पुष्टि हेपेटाइटिस की जांच और लिवर की जांच में हो रही है। यहां हर माह सौ से अधिक ऐसे मरीज सामने आ रहे है जिन्हें लिवर फेल होने पर हायर सेंटर जाने की सलाह दी जाती है।
हेपेटाइटिस के मरीजों में 40 फीसदी ऐसे मरीज सामने आ रहे हैं जो यह बताते हैं कि काफी समय से शराब पीते आ रहे हैं और अब बीमार हो गए। जांच होती है तो लिवर फेल हाेने की कगार पर होता है। जांच के बाद यहां गैस्ट्रो इंट्रोलॉजी विभाग व डॉक्टर न होने से इन मरीजों को किसी अच्छे मेडिकल कॉलेज जाने को कहा जाता है। अधिकांश लोग इलाज के अभाव में घर पर ही दम तोड़ देते हैं। जिले में मेडिकल कॉलेज होने के बाद भी इसका इलाज नहीं मिल पा रहा है।
यह है जिम्मेदारों की बात
हेपेटाइटिस के मरीजों के लिए जिले के नोडल अधिकारी और वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. एसएम कमल ने बताया कि तीन हजार से अधिक मरीज हेपेटाइटिस के सामने आ चुके हैं। लगभग 150 मरीज ऐसे सामने आए हैं जो शराब का अधिक सेवन करते थे, जिनका लिवर फेल होने की कगार पर था। ऐसे मरीजों को एम्स जाने की सलाह दी गई है। एम्स में कितने लोग इलाज कराने पहुंच सकते हैं, यह सब जानते हैं। ऐसे में लोगों की घर पर ही मौत हो जाती है।
लिवर फेल मरीज तो आते हैं, लेकिन यहां गैस्ट्रो इंट्रोलॉजी विभाग नहीं है। न ही डॉक्टरों की तैनाती है। जब भवन का निर्माण पूरा हो जाएगा, तब यह विभाग खुल सकेगा। - डॉ. एनसी प्रजापति, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज