वजीरगंज। डीएलएड में प्रवेश के नाम पर 40 हजार रुपये प्रति छात्र लेने के बाद भी प्रवेश नहीं कराया। परीक्षा होने तक आरोपियों ने कई बार में कुल 2.50 लाख रुपये की ठगी कर ली गई। पीड़ित ने पुलिस को शिकायती पत्र दिया, लेकिन कार्रवाई नहीं हो सकी। परेशान होकर उसने कोर्ट का सहारा लिया। अब आदेश के बाद तीनों लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी के आरोप में रिपोर्ट दर्ज की गई है। पुलिस ने विवेचना शुरू की है।
कस्बा निवासी अरविंद ने न्यायालय अपर सिविल जज (जूडि) द्वितीय में वाद दायर किया था। बताया था कि उसने अपने रिश्तेदारों व खुद को डीएलएड में प्रवेश लेने के लिए 40 हजार रुपये प्रति छात्र के हिसाब से शाहजहांपुर के थाना खुदागंज के गांव मझिला निवासी गुरपाल व उनकी रेखा देवी तथा एटा के थाना मिरहची के गांव ख्वाजीपुर अरविंद को दिए थे।
तीनों ने उनको बताया था कि उनका दाखिला ब्रजराज सिंह महाविद्यालय शिक्षा संस्थान यशोदानगर पुराओ जीटी रोड एटा में कराया गया है। जब वह प्रवेशपत्र लेने गया तो 1.30 लाख रुपये और ठग लिए। इसके बाद भी प्रवेशपत्र नहीं दिया। इससे उनकी साल भी बर्बाद हो गई और रुपये भी चले गए। पीड़िन ने थाना पुलिस से लेकर अधिकारियों से भी शिकायत की लेकिन कार्रवाई नहीं हो सकी। अब कोर्ट के आदेश पर तीनाें के खिलाफ वजीगरंज पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज की है।
सड़क दुर्घटना की नहीं दी बीमा राशि, डीएम समेत चार को नोटिस
- रोडवेज बस की टक्कर से हो गई थी बेटे की मौत
- लोक अदालत में वाद दायर हाेने के बाद जारी हुआ नोटिस
संवाद न्यूज एजेंसी
बदायूं। मुख्यमंत्री किसान दुर्घटना योजना में आवेदन निरस्त किए जाने के मामले में कोर्ट ने डीएम, एसडीएम समेत चार लोगों के खिलाफ स्थायी लोक अदालत ने नोटिस जारी किया है। उन्हें नौ जनवरी को अपना पक्ष रखने के लिए बुलाया गया है।
सदर कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ल ऊपरपारा निवासी सरवती 11 दिसंबर को वाद दायर किया था। बताया कि उसके बेटे संजू की 17 जनवरी 2023 को सिविल लाइंस क्षेत्र के शहीद पार्क के पास रोडवेज की बस ने टक्कर मार दी थी, जिसमें उसकी मौत हो गई थी। बेटा खेती करके परिवार का पालन पोषण किया करता था। मौत के बाद उसके सामने रोजी-रोटी की समस्या खड़ी हो गई है।
उसने 31 जनवरी 2023 को मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना के लिए आवेदन किया था। आवेदन के बारे में हल्का लेखपाल, तहसीलदार सदर से कार्यालय जाकर जानकारी ली तो बताया गया कि उसका आवेदन निरस्त कर दिया गया है। पता लगा कि लेखपाल ने गलत रिपोर्ट लगाकर आवेदन निरस्त करा दिया है, जिससे उसको योजना का लाभ नहीं मिल रहा है। आवेदन जिलाधिकारी कार्यालय से अस्वीकृत आदेश में एसडीएम सदर ने जांच की और लिखा कि मृतक के पास अपनी भूमि नहीं है। हादसे से पहले बेटा खेती कर अपने परिवार का भरण-पोषण करता था।