महिला अस्पताल में संचालित एसएनसीयू में ऐसे नवजात भर्ती किए जाते हैं जो नौ महीने से कम अवधि में पैदा हुए हैं या फिर वजन औसत से कम है। हर रोज ऐसे 10 से 15 बच्चे भर्ती किए जा रहे हैं। अधिकांश बच्चों को वेंटिलेटर की जरूरत रहती है, लेकिन यहां वेंटीलेटर के अभाव में नवजात दम तोड़ दे रहे हैं।
तीन-तीन घंटे वार्मर का करना पड़ता है इंतजार
महिला अस्पताल में 12 वार्मरों की क्षमता है, लेकिन यहां 17 से 18 नवजात हर समय भर्ती रहते हैं। नवजात को भर्ती कराने में तीन-तीन घंटे इंतजार करना पड़ता है। आरोप यह भी लगते आ रहे हैं कि कर्मचारी अवैध रूप से रुपये वसूलकर वार्मर जल्दी दे देते हैं। जो रुपये नहीं दे पाते हैं, टरका दिया जाता है। शनिवार को 14 बच्चे भर्ती थे। शहर के एक मोहल्ले से महिला बच्चे को भर्ती कराने यहां पहुंची तो वार्मर खाली नहीं था। महिला ने बच्चे को गोद में लेकर तीन घंटे तक इलाज कराया। हालत ठीक न होने पर परिजन बच्चे को निजी अस्पताल लेकर चले गए।
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सीएमएस बोलीं- वजन बहुत कम था
महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. इंदुकांत वर्मा ने बताया कि एसएनसीयू में जिन नवजातों की मौत हुई है उनको वजन बहुत कम था। डॉक्टरों ने प्रयास किया लेकिन बच्चों की जान बच सकी। वेंटीलेटर की सुविधा नहीं हैं। डॉक्टर रेफर करने को कहते हैं तो परिजन कहीं ले जाने को तैयार नहीं होते। शासन को कई बार पत्राचार किया है लेकिन वेंटीलेटर नहीं लग सके हैं।
डीएम अवनीश कुमार राय ने बताया कि एसएनसीयू में चार बच्चों की मौत की शिकायत मिली थी। इस पर अधिकारियों से जानकारी ली तो उन्होंने बताया कि सभी प्रीमेच्योर थे। इलाज के लिए उन्हें हायर सेंटर रेफर किया गया था, लेकिन परिवार के लोग नहीं ले गए। वेंटीलेटर की कमी के बारे में जानकारी नहीं है। इसे भी दिखवाया जाएगा।