फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जनरेटर चलाने में फूंक दिए तीन लाख

Thu, 04 May 2017 11:58 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ उझानी
विज्ञापन
अस्पताल
विज्ञापन
-सीएचसी पर बकाए में कई दिन पहले कटी थी बिजली      
विज्ञापन

-मरीजों के साथ स्वास्थ्य कर्मियों के परिवार वाले भी बेहाल      
करीब दो महीना पहले लाखों रुपये के बकाए में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) की बिजली काटे जाने के बाद भी अफसर चुप्पी साधे बैठे हैं। उन्हें न मरीजों की और न ही अपने स्वास्थ्य कर्मियों की परवाह है कि गर्मी के इन दिनों में किस तरह से दिन गुजार रहे होंगे। हालांकि अस्पताल में दो जनरेटर हैं लेकिन जनरेटर के इस्तेमाल के दौरान डीजल पर होने वाले खर्च पर गौर करें तो अब तक करीब तीन लाख रुपये का डीजल फूंका जा चुका है । इसके बावजूद मरीजों और तीमारदारों के लिए पंखे नहीं चलाए जा रहे हैं।  सीएचसी पर बिजली विभाग का करीब 78 लाख रुपया बकाया है। मार्च के पहले सप्ताह में अस्पताल की बिजली काट दी गई। बकाया जमा कराने को बिजली अफसरों ने कई बार चिकित्साधीक्षक से संपर्क भी साधा लेकिन उन्होंने मामला सीएमओ स्तर का बताकर अपना पल्ला झाड़ लिया। बिजली काटे जाने के बाद मरीजों, स्वास्थ्य कर्मियों तथा तीमारदारों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। प्रसव के लिए तीन दिन पहले भर्ती महिला के पति संजीव ने बताया कि जनरेटर चलने पर वार्ड में लाइट तो मिलती है लेकिन पंखे नहीं चलाए जाते। कमोवेश ऐसी ही परेशानी से स्वास्थ्य कर्मियों और उनके परिवार वालों को जूझना पड़ रहा है। स्वास्थ्य कर्मियों की मानें तो जनरेटर से सप्लाई मिलने पर पेयजल की व्यवस्था के अलावा कोई सुविधा नहीं मिल पाती है। बिजली काटे जाने वाले दिन से अब तक जनरेटर के इस्तेमाल के दौरान डीजल के रूप में होने वाले खर्च पर गौर करें तो जनरेटर चलाने पर प्रति घंटा चार लीटर डीजल फुंकता है। इस लिहाज से प्रतिदिन 20 घंटे में साढ़े चार हजार रुपये के हिसाब से प्रतिमाह लगभग 1.35 लाख रुपये के करीब खर्च पहुंच जाता है। जानकार बताते हैं कि डीजल खर्चे के मुकाबले बिजली का बिल काफी कम आता लेकिन अफसर बकाया बिल जमा करना उचित नहीं समझते।      
0000000000      
जिले की हर सीएचसी की बत्ती गुल      
उझानी। जिले में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों समेत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के बिजली बिल का भुगतान के लिए मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय से धन अवमुक्त होता है। बिल का भुगतान करने के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय को डिमांड भी भेजी जाती है लेकिन पिछले साल ऐसा नहीं किया गया। इसी वजह से बिल चुकता करने को धनराशि भी रिलीज नहीं हो पाई। नतीजा यह निकला कि बिजली विभाग ने सभी 15 सीएचसी की बत्ती गुल कर दी।      
विज्ञापन
विज्ञापन

0000000000      
वर्जन      
बिजली का बकाया बिल जमा करने के लिए स्थानीय स्तर पर धनराशि की व्यवस्था नहीं होती। अफसरों को भी हकीकत की जानकारी है। फिर भी जनरेटर के जरिए वैक्सीन सुरक्षित रख राष्ट्रीय स्तर के प्रोग्राम को सफल बनाने के लिए कोशिश की जाती रही है।
- डॉ. मोहम्मद तहसीन, चिकित्साधिकारी
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें