बिसौली के हत्सा गांव में शोक में डूबी महिलाएं। संवाद
- फोटो : Samvad
बिसौली। जिन चार दोस्तों की दोस्ती के किस्से कभी हत्सा गांव की गलियों में गूंजते थे, सोमवार को उनमें से तीन की मौत के बाद एक साथ जलीं चिताओं से पूरे गांव में मातम पसर गया। गांव की जिन गलियों में तीनों की हंसी सुनाई देती थी, वहां अब सिर्फ सिसकियां थीं।
स्कूल बस से हुई दुर्घटना में जान गंवाने वाले तीनों दोस्तों के शव पोस्टमॉर्टम के बाद मंगलवार सुबह गांव पहुंचे तो अंतिम दर्शन के लिए हुजूम उमड़ पड़ा। कोतवाली क्षेत्र के गांव हत्सा के ग्रामीणों ने बताया रोहन, निखिल, ऋषभ और घायल शिवकुमार की आपस में गहरी दोस्ती थी। अपने काम से खाली होने के बाद चारों साथ बैठते और काफी देर तक बातें किया करते थे। सुख-दुख में एक-दूसरे के साथ खड़े रहने वाले दोस्तों के अचानक बिछुड़ने से गांव के लोग स्तब्ध हैं।
ऋषभ अपने पिता का इकलौता बेटा था। दो साल पहले बड़े बेटे मनोज को खो चुकी मां रज्जो के सामने अब दूसरे बेटे को खोने का असहनीय दुख है। वहीं, रोहन और निखिल के परिवारों में भी मातम पसरा है। निखिल के पिता का करीब एक साल पहले बीमारी से निधन हो गया था। बेटे की मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। मंगलवार को जब गांव में ही तीनों की चिताएं एक साथ जलीं तो अंतिम विदाई देने पहुंचे लोगों की आंखें भर आईं।
सीओ बिसौली अंशुमन श्रीवास्तव ने बताया कि तीनों मृतकों के परिजनों ने तहरीर दी है। बस चालक के विरुद्ध तहरीर पर केस दर्ज कर लिया गया है।
बिसौली के हत्सा गांव में शोक में डूबी महिलाएं। संवाद- फोटो : Samvad