सैदपुर में जलसे में तकरीर देते मौलाना। संवाद
सैदपुर। नजफ अशरफ रहमतुल्लाह अलैह के 168वें उर्स शरीफ़ के मौके पर उलेमाओं ने तकरीर पेश की। सुबह कुल शरीफ की रस्म अदायगी के साथ तीन रोजा उर्स का समापन हुआ। इस दौरान जायरीनों ने अकीदत के साथ चादरें चढ़ाई और गुलपोशी कर कौम व मुल्क की खुशहाली के लिए दुआ की।
मोहल्ला अशरफ नगर बड़ा तकिया में स्थित प्रसिद्ध नजफ अशरफ रहमतुल्लाह अलैह दादा मियां की दरगाह पर उर्स का आयोजित हुआ। इसमें अलबरकात के डायरेक्टर और माहरेरा शरीफ़ दरगाह के सज्जादानशीं के बेटे मौलाना सय्यद अमान मियां ने तक़रीर की। कहा कि हमें अपने बच्चों की अच्छी परवरिश के साथ उनकी तालीम पर ध्यान देना चाहिए। वर्तमान में समाज के हिसाब से हमें चलने की जरूरत है। उन्होंने दीनी और दुनियाबी तालीम पर जोर दिया। बेटियों की तालीम को प्राथमिकता की जरूरत है। बेटी पढ़ी लिखी होगी तो हमारी नस्ल कामयाबी की मिसाल पेश करेगी।
उन्होंने कहा कि आज के दौर में हमें छोटे बच्चों को मोबाइल से दूर रखने की जरूरत है। सोशल मीडिया की वजह से बच्चे गुमराह हो रहे हैं। मौलाना इकबाल भोजपुरी ने कहा अल्लाह ताला ने हमारी रहबरी के लिए दुनिया में नेक बंदों को भेजा है। इनसे मोहब्बत करनी चाहिए। जलसे में मौलाना शाने आलम ख़ान, मौलाना राहिल रज़ा, हाफ़िज़ रिज़वान नूरी ने तकरीर पेश की।
इससे पूर्व बस अड्डे से लेकर दरगाह शरीफ तक माहरेरा शरीफ़ दरगाह के सज्जादानशीं सय्यद अमीन मियां और उनके बेटे मौलाना सय्यद अमान का जगह-जगह रोक कर फूलों की बारिश कर जोरदार स्वागत किया गया। आखिर में कुल शरीफ की रस्म अदायगी के बाद अंजुमन दरगाह हज़रत नजफ अशरफ रहमतुल्लाह की ओर से लंगर का आयोजन किया गया। इस मौके पर हाफिज अदीब रज़ा, मौलाना मुमताज़ हैदर, डॉ. फ़ैज़ान अली ख़ान, कारी नौशाद रज़ा, हाफ़िज़ अकरम नूरी, सिराज शाह, रहीस अली, हाफिज इफ्तिखार रज़ा मौजूद रहे।