बदायूं। मकान के नींव की ईंट उखाड़ने के विरोध में 11 साल पहले की गई एक व्यक्ति की हत्या के मामले जिला एवं सत्र न्यायाधीश विवेक सगल ने तीन लोगों को दोषी पाया। उन्होंने तीनों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इन पर 12-12 हजार रुपये जुर्माने भी लगाया। जबकि चौथे आरोपी की मुकदमा की सुनवाई के बीच ही मौत हो चुकी है।
कोतवाली बिसौली क्षेत्र गांव परवेज नगर अफगना निवासी करूं सिंह ने तहरीर देकर बताया था कि उनके भाई अतर ने मकान की नींव भरवाई थी। गांव के ही धीरेंद्र, प्रेमपाल, नेत्रपाल, ऋषिपाल ने जमीन को खुद का बताते हुए मकान बनने नहीं दिया। 13 मार्च 2014 की रात करूं व अतर अपने घर पर सो रहे थे। इसी दौरान रात लगभग 11 बजे उपरोक्त लोग भाई की जमीन पर पहुंचे और नींव की ईंटें उखाड़कर फेंकना शुरू कर दिया। आवाज सुनकर अतर व उनके बड़े भाई इंद्रपाल और गांव के अन्य लोग आ गए थे। उन्होंने ईंट उखाड़ने से मना किया तो ऋषिपाल, नेत्रपाल और प्रेमपाल के कहने पर धीरेंद्र ने भाई अतर को जान से मारने की नीयत से तमंचे से उस पर फायर कर दिया। गोली अतर की गर्दन के नीचे सीने पर लगी और वह बेसुध होकर गिर गए। घटना के समय मौजूद गांव के स्वराज, ओमकार व ग्रामीण घायल अतर को ट्रैक्टर से थाने ले गए थे। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की। घटना के दो दिन के बाद बरेली के निजी अस्पताल में घायल अतर ने दम तोड़ दिया था। पुलिस ने मुकदमा हत्या में तरमीम किया। न्यायालय में सभी पर हत्या का मुकदमा चलाया गया। न्यायाधीश ने पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्य का अवलोकन किया। अभियोजन पक्ष और बचाव पक्ष के अधिवक्ता की दलीलों को सुनने के बाद तीनों आरोपियों को दोषी पाते हुए सजा सुनाई है। वहीं चौथे आरोपी ऋषिपाल की मुकदमा के दौरान मौत हो गई थी।