बरसात से तबाही का मंजर देख चुके काश्तकारों को राहत पहुंचाने के लिए शासन भले ही खरीद के दौरान गेहूं की गुणवत्ता को लेकर नरम रुख अख्तियार कर चुका है लेकिन प्रशासन क्या चाहता है, इसकी हकीकत जाननी है तो मंडी समिति परिसर आना पड़ेगा। गेहूं की खरीद करा रहे पीसीएफ के सेंटर का नामोनिशान ही नजर नहीं आया। यूपी स्टेट एग्रो का सेंटर है पर वह भी बेरौनक दिखा। तौल को कांटे की छोड़िए, दुकान के बाहर बैनर भी नहीं लटकाया गया है।
यूपी स्टेट एग्रो के गेहूं खरीद केंद्र कृषि उत्पादन मंडी समिति की दुकान में है, उसे देख काश्तकार शायद ही अनुमान लगा पाएं कि यहां खरीद होती होगी। तालाबंद दुकान के बाहर बैनर भी नहीं लटकाया गया है। किसी तरह मिले सेंटर इंचार्ज के सेलफोन नंबर पर संपर्क साधने पर पता चला कि चार अप्रैल को सेंटर खुला। अब तक करीब साढे़ सात क्विंटल गेहूं की तौल हो चुकी है। चूंकि दिन रविवार का है, सो सेंटर पर कोई नहीं बैठा। इसके विपरीत आढ़तों पर गेहूं की जबर्दस्त आवक दिखी। आढ़तों के सामने गेहूं के ढेर भी लगे नजर आए।
मंडी समिति कर्मियों और आढ़तियों की मानें तोक्रय केंद्र एक और है। पीसीएफ को भी मंडी में सेंटर लगाकर गेहूं की खरीद करने का निर्देश है लेकिन परिसर में कहीं पर भी उसका क्रय केंद्र नजर नहीं आया। पीसीएफ के जिला प्रबंधक बलवंत सिंह ने बताया कि सेंटर तो खुला है लेकिन स्टाफ के अभाव में तौल शुरू नहीं हो पा रही है। इधर, सूत्रों का कहना है कि गेहूं खरीद के मुद्दे पर प्रशासन शुरूआत से ही ढुलमुल नीति अख्तियार किए हुए है।
भाकियू करेगी आवाज बुलंद
उझानी। भारतीय किसान यूनियन के ब्लॉक अध्यक्ष सोमवीर सिंह ने बताया कि प्रशासन गेहूं खरीद को लेकर अपनी नीति स्पष्ट नहीं कर पा रहा है। इसे अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सेंटरों पर किसानों के गेहूं की सीधे खरीद शुरू नहीं हुई तो आंदोलन किया जाएगा।