बदायूं। मूसाझाग थाना क्षेत्र के ग्राम सैजनी स्थित एचपीसीएल प्लांट में दो अधिकारियों की गोली मारकर हत्या करने वाले आरोपी के खिलाफ पहले पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। लेकिन जब इतनी बड़ी वारदात हो गई तो आरोपी खुद ही थाने चलकर जा पहुंचा। ऐसे में जब पुलिस की खुद की गर्दन फंसने लगी तो आनन-फानन तमंचा बरामद करने के बहाने आरोपी व पुलिस के बीच मुठभेड़ का दावा कर दिया।
आरोपी के दोनों पैर में गोली लगने की बात बताई गई, वहीं एक सिपाही के भी गोली लगने से घायल होने की बात कही जा रही है। दोनों का जिला अस्पताल में इलाज कराया गया, लेकिन उन्हें मीडिया से दूर रखा गया। अब पुलिस की इस मनगंढ़त तरीके से की जाने वाली मुठभेड़ भी सवालों के घेरे में आ गई है। सटीक निशाने से सवाल उठना लाजमी भी है क्योंकि आरोपी अजय प्रताप के दोनों पैर के घुटने में लगीं।
क्षेत्राधिकारी उझानी डॉ. देवेंद्र कुमार ने बताया कि 12 मार्च को दोपहर ग्राम सैजनी स्थित एचपीसीएल प्लांट में अजय प्रताप सिंह (34) ने प्लांट के उप महाप्रबंधक सुधीर गुप्ता (58) निवासी वृंदावन रेजिडेंसी बरेली और सहायक मुख्य प्रबंधक हर्षित मिश्रा (34) निवासी साहूकारा मोहल्ला, पूरनपुर (पीलीभीत) को गोली मार कर हत्या कर दी थी। इस मामले में पुलिस ने आरोपी अजय प्रताप सिंह को गिरफ्तार किया था।
पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह एचपीसीएल प्लांट में वेंडर के रूप में काम करता था। सुधीर गुप्ता और हर्षित मिश्रा ने उसे नौकरी से निकाल दिया था और उसके खिलाफ थाने में रिपोर्ट भी दर्ज करा दी थी। इसी रंजिश में दो तमंचे लेकर प्लांट पहुंचकर उसने दोनों अधिकारियों को गोली मार दी और घटना में प्रयुक्त तमंचा ग्राम मुडसैना के जंगल में छिपा दिया।
शुक्रवार भोर को पुलिस आरोपी को साथ लेकर तमंचा बरामद करने के लिए मुडसैना के जंगल पहुंची। आरोपी ने छिपाए गए तमंचे से इसी दौरान पुलिस टीम पर फायरिंग कर दी। गोली सिपाही ओमबीर सिंह के बाएं हाथ में लग गई। पुलिस ने आत्मरक्षा में जवाबी फायरिंग की, जिसमें आरोपी के दोनों पैरों में गोली लगने से वह घायल हो गया। इसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।
घायल सिपाही और आरोपी को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। पुलिस ने आरोपी के पास से घटना में प्रयुक्त 315 बोर का तमंचा और दो खोखा कारतूस बरामद किए हैं। सीओ ने बताया कि मामले में आगे की विधिक कार्रवाई की जा रही है। अजय को कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया।
अजय पर पहले से हैं केस
पुलिस के अनुसार आरोपी अजय प्रताप सिंह के खिलाफ पहले भी केस दर्ज हैं। इनमें हजरतपुर थाने व मूसाझाग थाने में दर्ज एफआईआर शामिल हैं।
घायल सिपाही की मीडिया से बनाई गई दूरी
पुलिस की यह मुठभेड़ इसलिए भी सवालाें के घेरे में है कि आरोपी का वीडियो तो पुलिस ने सोशल मीडिया एकाउंट पर जारी किया, जिसमें वह दोनों पैर से लंगड़ाता दिख रहा है। लेकिन सिपाही का फोटो व वीडियो सामने नहीं लाया गया।
गले नहीं उतरी रही मुठभेड़ की पुलिस की कहानी
पुलिस का कहना है कि जब आरोपी अजय प्रताप सिंह को ग्राम मुडसैना के जंगल के पास लेकर जाया गया तो उसने वहां पहले से छिपाए गए 315 बोर के तमंचे से फायर कर दिया। जबकि पुलिस के स्तर से यह भी बताया गया कि आरोपी ने दो तमंचों से दोनों हाथ से फायरिंग की थी। लेकिन तमंचा एक बरामद हुआ वह भी लोडेड था। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि क्या तमंचा पहले से आरोपी ने लोड कर रखा था और जैसे ही पुलिस उसे लेकर गई उसने तमंचा उठाकर फायर कर दिया।
कंपनी के गार्ड व वाहन चालक से भी पूछताछ कर रही पुलिस
इस वारदात के बाद यह बात सामने आई है कि कंपनी में तैनात सुरक्षा गार्डों ने भी आरोपी को अंदर जाने से नहीं रोका। गार्डों से उसकी जान पहचान बताई जा रही है। वहीं कंपनी की जिस बोलेरो गाड़ी से वह अंदर गया उसका चालक भी पहचान वाला था। ऐसे में मूसाझाग पुलिस ने इन सभी को बुलाकर पूछताछ शुरू कर दी है।