दबतोरी। सीता माता से आज्ञा लेकर हनुमानजी अपनी भूख मिटाने अशोक वाटिका पहुंचे। वह फल खाते हैं और पेड़ों को उखाड़ फेंकते हैं। राक्षसों ने रोका तो वह उन्हें मार-मारकर भगा दिए। पिटे-कुटे राक्षस रावण के पास पहुंचते हैं और सारा वृतांत सुनाया।
रावण के आदेश पर हनुमानजी की पूंछ पर तेल और कपड़ा लपेटा गया। हनुमानजी अप्रत्याशित रूप से अपनी पूंछ बढ़ाते गए। हाल यह हो गया कि- रहा न नगर बसन घृत तेला, बाढी पूंछ कीन्ह कपि खेला। आदर्श रामलीला क्लब दबतोरी के डायरेक्टर सतेंद्र पाल सिंह एडवोकेट के निर्देशन में स्थानीय कलाकारों ने सीता की खोज का मंचन किया। रामलीला देखने वालों में अवधेश भदौरिया, उमेश भदौरिया, अरुण सिंह, शिवओम सिंह, रोहित चौहान, अंकुर चौहान ओमेंद्र भदौरिया, रामवीर पाठक, धनपाल भदौरिया आदि मौजूद रहे।
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कथा समापन के बाद हुआ भंडारा
गुलड़िया। ग्राम देवता के मंदिर पर चल रही संगीतमय कथा का नवें दिन समापन हुआ। आचार्य कुमारी ज्योति ने मंगलवार की रात विधि विधान से कथा समापन की घोषणा की। कथा के बाद विशाल भंडारा में नगर व आसपास क्षेत्र के गावों से आए लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। भंडारा सुबह 10 बजे से शाम पांच बजे तक चला।परीक्षित बने पप्पू सिंह व धर्म पत्नी नीलम पटेल ने कन्याओं के पैर छू कर दक्षिणा दी। संवाद
खेत से निकले दो पत्थर, शिव-पार्वती मान शुरू हुई पूजा
जरीफनगर। जरीफनगर थाना क्षेत्र के गांव मिर्जापुर मोहसनपुर निवासी उमेश के खेत में जमीन खोदाई के दौरान दो पत्थर निकले हैं। इन्हें लोग शिव-पार्वती का रूप मानते हुए पूजा अर्चना करने में जुट गए हैं। खेत स्वामी उमेश ने दावा किया कि उनके 14 वर्षीय पुत्र अखिलेश ने स्वप्न देखा था कि उसके खेत में शिवजी हैं। बताए गए स्थान पर खोदाई की गई तो दो पत्थर नजर आए। लोग इसे शिव पार्वती का रूप मानकर देखने पहुंच रहे हैं और वहीं पूजा करने लगे। फिलहाल कई लोगों ने इसे अंधविश्वास बताया। संवाद
दबतोरी की रामलीला में रावण- हनुमान संवाद का मंचन। संवाद
दबतोरी की रामलीला में रावण- हनुमान संवाद का मंचन। संवाद