जिले में शासन की बच्चों को हर बुधवार को दूध वितरण करने की महत्वपूर्ण योजना पूरी तरह फ्लाप होती दिख रही है। ग्रीष्मावकाश के बाद खुले स्कूलों में पहले बुधवार को ही दूध का वितरण नहीं हो पाया। यह जरूर है कि सरकारी आंकड़ों में हर स्कूल में बच्चों को दूध का वितरण किया जाना दर्शा दिया गया होगा। पहला बुधवार होने के बाद भी विभागीय अधिकारी स्कूलों को चेक करने को भी नहीं निकले।
परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के ठहराव के लिए शासन द्वारा हर तरह के प्रयास किए जा रहे हैं। रोजाना बच्चों को एमडीएम दिया जाता है। इसके अलावा पिछले शैक्षिक सत्र से बच्चों को प्रत्येक बुधवार को 200 ग्राम के हिसाब से दूध का वितरण भी किए जाने के आदेश हैं। चालू माह से शासन ने हर सोमवार को मौसमी फल बांटे जाने के आदेश जारी किए हैं। ग्रीष्मावकाश के बाद आज पहला बुधवार था। सो बच्चों को दूध का वितरण होना था। सूत्र बताते हैं कि जिले के ज्यादातर स्कूलों में बच्चों को दूध नहीं दिया गया। शहर के आसपास के जरूर कुछ विद्यालयों में बच्चों को दूध का वितरण किया गया।
लोगों द्वारा विभागीय अधिकारियों से दूध वितरण न होने की शिकायतें भी की जाती रहीं हैं, बावजूद इसके अधिकारी खामोश हैं। आज भी विभागीय अधिकारियों ने स्कूलों में पहुंचकर यह जानने की जहमत नहीं उठाई की। लोगों का कहना है कि दूध और फल वितरण के दिन अधिकारियों को स्कूलों में पहुंचकर देखना चाहिए। इस संबंध में बीएसए पीसी यादव से बात करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने मोबाइल कॉल रिसीव नहीं किया।