बदायूं। जिला मुख्यालय से आंवला की दूरी करीब 27 किलोमीटर है। 200 से अधिक गांव ऐसे हैं, जहां के लोगों का शहर में रोजाना आना-जाना रहता है। करीब दो हजार से अधिक लोग शहर में किसी न किसी काम से आते और जाते हैं। बावजूद इसके रोडवेज बस नहीं होने से डग्गामार वाहन ही एकमात्र सहारा है। ऐसे में कई बार टेंपो पलटने से घटनाएं भी हो चुकी हैं, मांग के बाद भी इस मार्ग पर रोडवेज बसों का संचालन नहीं हो पा रहा है।
बता दें कि टेंपो चालक शहर के लावेला चौक से सवारियों को बैठाकर आंवला जाते हैं। इस मार्ग पर सौ से अधिक टेंपो चलते हैं। रोडवेज बस का संचालन न होने की वजह से लोगों को दिक्कत होती है। यात्रियों ने कई बार एआरएम से बस के संचालन की मांग की लेकिन अब तक बस का संचालन नहीं सका है।
देर रात को लौटकर आते समय वाहन नहीं मिलते हैं। ऐसे में टेंपो चालक 20 की जगह 40 रुपये वसूलते हैं। काफी दिक्कत आती है।
- भगवानदास
शहर में दुकान है। देर रात तक लौटते हैं। दिन में टेंपो चालक अधिक सवारियां भरकर दौड़ते हैं। ऐसे में डर लगा रहता है कि कहीं कोई हादसा न हो जाए। बस न होने से दिक्कत होती है।
- गौस मोहम्मद
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घरेलू सामान लाने के लिए शहर जाना पड़ता है। डग्गामार ही एकमात्र सहारा हैं। बस के संचालन की मांग कर चुके हैं लेकिन इस ओर ध्यान नहीं दिया गया है।
- झब्बू
रात में ही आंवला तक बस का संचालन किया जाए तो लोगों को अधिक राशि नहीं देनी पड़ेगी लेकिन परिवहन विभाग इस ओर ध्यान ही नहीं दे रहा है।
- देव कुमार
अभी चार्ज मिला है। दिखवाता हूं कि आखिर बस का संचालन क्यों नहीं हो रहा है। अगर रूट पर सवारियां हैं तो बस का संचालन कराया जाएगा।
- प्रदीप कुमार, प्रभारी एआरएम
कुंवरगांव में ऑटो में जातीं सवारियां। संवाद
कुंवरगांव में ऑटो में जातीं सवारियां। संवाद
कुंवरगांव में ऑटो में जातीं सवारियां। संवाद
कुंवरगांव में ऑटो में जातीं सवारियां। संवाद