बाजार में बिक रहा स्टीकर लगा सेब। संवाद
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बदायूं। शासन ने स्टीकर लगे फलों की बिक्री पर तीन साल पहले रोक लगाने के निर्देश दिए थे। बावजूद इसके तीन साल बाद भी खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रशासन विभाग इस पर रोक नहीं लगा सका है। जांच के नाम पर अधिकारी केवल कोरम पूरा करते दिखाई देते हैं।
प्रदेश सरकार ने सन 2018 में स्टीकर लगे फलों को स्वास्थ्य के लिए हानिकारक मानकर इनकी बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया था। स्टीकर लगे फल बेचने वाले दुकानदारों पर मुकदमा और दो लाख तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया, लेकिन जिले में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने शुरुआती कार्रवाई करने के बाद इस ओर से आंखें मूंद लीं। हालात ये हैं कि जिले में इस समय बड़ी और छोटी दुकानों से लेकर मंडी तक में दुकानदार स्टीकर लगे फलों की धड़ल्ले से बिक्री कर रहे हैं। स्टीकर लगाने के पीछे दुकानदारों की मंशा अच्छी क्वालिटी का फल दिखाने की होती है। उन्हें इससे कोई मतलब नहीं है कि उससे मानव जीवन पर क्या प्रभाव पड़ेगा।
शुरुआती दौर में की गई थी कार्रवाई
फलों पर स्टीकर लगाने के दौरान गोंद का इस्तेमाल किया जाता है। कई बार लोग केवल स्टीकर छुटाकर बिना सही से धोए ही फल खा लेते हैं। ऐसे में गोंद उनके शरीर में जाता है। जांच में इस तरह के गोंद को धीमा जहर माना गया था। इसके बाद शासन ने स्टीकर चिपकाने पर रोक लगाई थी। तीन साल पहले टीम ने दुकानों से लेकर ठेलों तक छापा मारा था। उस समय फलों से स्टीकर गायब हो गए थे, जो अब एक बार फिर धड़ल्ले से लगाए जा रहे हैं।
फलों पर स्टीकर लगाकर होने वाली बिक्री के खिलाफ जल्द ही अभियान चलाया जाएगा। ताकि लोगों के स्वास्थ्य पर कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़े।
- चंद्र शेखर मिश्रा, मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी