तीन घंटे डायल किया, एक बार भी नहीं लगा 100 नंबर
हाइवे पर मां-बेटी से गैंगरेप से भी नहीं लिया सबक
दिल्ली-कानपुर नेशनल हाइवे-91 पर कार रोक कर इसमें सवार मां-बेटी के साथ गैंगरेप की वारदात ने पूरे सूबे को झकझोर दिया है। लापरवाही के चलते बुलंदशहर के एसएसपी समेत कई पुलिस अफसरों को सस्पेंड भी किया गया है। सनसीखेज इस मामले की संसद तक गूंज है। प्रदेश सरकार दवाब में है। इतना ही नहीं इस घटना के बाद 100 नंबर से लोगों का भरोसा उठने लगा है। दरअसल, बदमाशों के चुंगल में फंसे इस परिवार ने 100 नंबर पर चार बार फोन किया था, लेकिन एक बार भी बात नहीं हुई।
बुलंदशहर की इस घटना के तीन दिन बाद अमर उजाला ने 100 नंबर की सक्रियता की पड़ताल की तो सच सामने आ गया। तीन घंटे तक समय-समय पर 100 नंबर पर नौ बार कॉल की गई। पुलिस का यह महत्वपूर्ण नंबर एक बार भी नहीं लगा। शाम 4:16 बजे से रात 7:16 बजे तक यह कॉल की गईं। इसमें गलती बीएसएनएल की है या फिर पुलिस महकमे की यह तो जांच का विषय है, लेकिन इतना साफ है कि यही लापरवाही जनता पर भारी पड़ रही है। जाहिर है कि अगर इस वक्त कोई मुसीबत में 100 नंबर पर कॉल कर रहा होता तो उसको पुलिस की सहायता नहीं मिलती। बदमाश अपना काम कर जाते और पुलिस लकीर पीटती रह जाती, जैसा कि बुलंदशहर के मामले में हुआ है।
मुसीबत में फंसे लोगों को जब पुलिस की मदद की जरूरत होती है तो वह सबसे पहले 100 नंबर पर ही कॉल करते हैं। इस नंबर पर पहले तो फोन लगता ही नहीं। अगर फोन लग भी जाता है तो इसे रिसीव करने वाला कोई नहीं होता। जाहिर है कि इस तरह से लोगों का 100 नंबर से भरोसा उठने लगा है।
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थानेदार तो दिन में भी नहीं रिसीव करते फोन
बदायूं। अक्सर लोगों की शिकायत होती है कि घटना के वक्त उन्होंने संबंधित एसओ को फोन किया था, लेकिन फोन रिसीव नहीं हुआ। समय दिन का हो या रात का जिले में तमाम थानेदारों को यह इल्म आता है कि फोन रिसीव न करके उनको किस तरह से बचना है। थानेदार इसी इल्म का फायदा उठाकर बच जाते हैं।