इस्लामनगर (बदायूं)। गांव ब्यौर कासिमाबाद में प्रभातफेरी रोके जाने पर बवाल के बाद एडीएम प्रशासन अरुण कुमार व एसपी देहात ह्देश कठेरिया ने पूरे मामले की गहनता से जांच पड़ताल की। गांव के लोगों से पूछताछ की। करीब दो घंटे की पूछताछ के बाद दोनों अधिकारियों ने माना कि गांव के लोग अपने सही रूट पर ही प्रभातफेरी निकाल रहे थे। पुलिस ने किस आधार पर रोका, अब इसकी जांच शुरू कर दी गई है। वहीं बवाल शुरू होने के 12 घंटे के बाद प्रभातफेरी पुराने रूट से ही निकलवाई गई।
जिस रूट पर जाने से रोकने पर पुलिस ने लाठियां फटकारीं और 10 से अधिक लोग घायल हुए, वही रूट सही था। फिर पुलिस ने किसके इशारे पर इतना बड़ा कदम उठाया, अब इसकी जांच होना है। ग्रामीणों का कहना है कि पुराना रूट सही मानने से साफ हो गया है कि थाना पुलिस की मानसिकता ठीक नहीं थी। थानाध्यक्ष नरेश कुमार और सीओ बिल्सी संजीव कुमार ने अफसरों को गुमराह किया, जिससे मामला इतना बढ़ गया। लोगों का कहना है कि अधिकारियों ने मामले की जांच का आश्वासन दिया, इसके बाद वे अपने गांव लौट गए। उनका तो इस मामले में कोई गलत इरादा रहा ही नहीं।
पुलिस पर कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों ने थानाध्यक्ष व पुलिसकर्मियों पर मारपीट व धार्मिक कार्य में बाधा डालने पर कार्रवाई की मांग करते हुए सामूहिक रूप से एसपी देहात ह्देश कठेरिया को शिकायती पत्र सौंपा है। इसमें आरोप है कि दूसरे समुदाय के लोगों ने भले ही बृहस्पतिवार को प्रभातफेरी को लेकर आपत्ति जताते हुए पुलिस से शिकायत की थी, लेकिन पुलिस को मामले की जांच कर श्रद्धालुओं से बात करनी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। सुबह पांच बजे थानाध्यक्ष नरेश कुमार सिंह व सीओ बिल्सी संजीव कुमार पुलिस बल के साथ गांव पहुंचे और प्रभातफेरी को रोक दिया। एसएसपी देहात ने पूरे मामले की जांच सीओ बिल्सी को सौंपी है। जांच के बाद दोषी पुलिस कर्मियों पर कार्रवाई तय मानी जा रही है।
रास्ता खराब बताकर सपा सरकार में रोकी गई थी प्रभातफेरी
ग्रामीण वीकेश शर्मा ने बताया कि प्रभातफेरी करीब 50 साल से वह खुद देखते आ रहे हैं। सपा सरकार की बात है कि वर्ष 2014 में इस रूट पर जलभराव हो गया था। उस समय दूसरे समुदाय के लोगों ने एतराज किया था तो गांव के लोगों ने रास्ता ठीक होने तक दूसरे रास्ते से प्रभातफेरी निकाल ली थी। तब से उसी रूट से निकल रही थी। इस बार माघ का महीना शुरू हुआ तो अपने पुराने रूट से ही प्रभातफेरी शुरू की गई। किसी ने कोई आपत्ति नहीं की। शुक्रवार को पुलिस ने खुद आकर प्रभातफेरी को रोका, जिसके बाद लोगों में आक्रोश फैल गया।
भगदड़ में ये हुए घायल
लाठियां फटकारने से हुई भगदड़ में गांव ब्यौर निवासी चंचल, महेंद्र शर्मा, जसोदा मौर्य, आनंद शर्मा, मोहित सिंह समेत 10 से अधिक लोग घायल हुए हैं। एसएसपी ने हालत बिगड़ते देखे तो सिविल लाइंस इंस्पेक्टर हरेंद्र सिंह को गांव में भेजा। वह करीब एक साल से अधिक इस्लामनगर थाने के प्रभारी रह चुके हैं। उन्होंने गांव पहुंचकर घायलाें को अपनी सरकारी गाड़ी से अस्पताल पहुंचाकर उपचार कराया।
एसपी सिटी की जांच के बाद होगी कार्रवाई
मामले की विस्तृत जांच एसपी सिटी विजयेंद्र द्विवेदी को सौंपी गई है। उनकी जांच रिपोर्ट के आधार पर थानाध्यक्ष से लेकर बीट के सिपाही आदि पर कार्रवाई हो सकती है। क्योंकि पुलिस की मनमानी तो अधिकारियों की प्रथम जांच में उजागर हो चुकी है।
जिस रूट से प्रभातफेरी ग्रामीण निकाल रहे थे उसी रूट से पुलिस की मौजूदगी में प्रभातफेरी निकलवा दी गई है। रूट निर्धारण के लिए एसडीएम बिसौली राशि कृष्णा को एडीएम प्रशासन ने जांच दी है। साथ ही पूरे मामले की जांच एसएसपी ने एसपी सिटी को दी है। जांच में जो भी दोषी होगा, एसएसपी के माध्यम से कार्रवाई की जाएगी।- ह्देश कठेरिया, एसपी देहात
लाठी चार्ज में घायल चंचल व दो अन्य महिलाएं।संवाद- फोटो : मृतका स्वप्निल तिवारी।
लाठी चार्ज में घायल चंचल व दो अन्य महिलाएं।संवाद- फोटो : मृतका स्वप्निल तिवारी।
लाठी चार्ज में घायल चंचल व दो अन्य महिलाएं।संवाद- फोटो : मृतका स्वप्निल तिवारी।
लाठी चार्ज में घायल चंचल व दो अन्य महिलाएं।संवाद- फोटो : मृतका स्वप्निल तिवारी।