बदायूं। बरेली-मथुरा राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-530बी) को छह लेन में परिवर्तित करने की दिशा में कार्य तेज हो गया है। परियोजना के पहले चरण में कछला से बदायूं बाइपास तक सड़क चौड़ीकरण के लिए करीब 272 मकानों व दुकानें, होटल व ढाबे हटाए जाने हैं। एनएचएआई की ओर से हाल ही में सभी प्रभावित निर्माणों पर लाल निशान लगाए जाने के बाद क्षेत्र में हलचल बढ़ गई है। इस पूरे काम के लिए 1085.47 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए हैं। इस बजट से सड़क निर्माण व लोगों को मुआवजा देने का काम किया जा रहा है।
सड़क चौड़ीकरण के लिए मकानों पर दुकानों पर लगे लाल निशान के बाद कई परिवारों ने भारी नुकसान से बचने के लिए अपने मकान स्वयं तोड़ना शुरू कर दिए हैं। कई जगह लोग मजदूर लगवाकर छतें व दीवारें गिराते दिखाई दे रहे हैं। उनका कहना है कि जब हटना ही है तो खुद ही हटाकर नुकसान कम किया जाए।
प्रशासन ने प्रभावित लोगों को एक माह के भीतर अपने निर्माण स्वयं हटाने के निर्देश दिए हैं। समय सीमा पूरी होने के बाद जो निर्माण नहीं हटाए जाएंगे, उन्हें जेसीबी मशीन की मदद से बलपूर्वक गिराया जाएगा। इसके बाद सड़क चौड़ीकरण, छोटी पुलिया समेत अन्य कार्यों को किया जाएगा।
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लोगों में चिंता, पर सुरक्षा और विकास की उम्मीद भी
कुछ प्रभावित परिवारों ने चिंता जताई कि कई वर्षों की कमाई से बनाए गए मकान गिरने से उन्हें आर्थिक चोट लगेगी। वहीं, दूसरी ओर कई लोगों का कहना है कि हाईवे चौड़ा होने से क्षेत्र में यातायात सुगम, दुर्घटनाएं कम होंगी और भविष्य में व्यापारिक गतिविधियां बढ़ेंगी। कछला निवासी दुकानदार रमेश ने बताया कि हमारी दुकान मुख्य सड़क से लगी है, इसलिए हटना तय है। दुख जरूर है, लेकिन सरकार सड़क चौड़ी कर रही है तो फायदा भी होगा। ग्राहक भी बढ़ेंगे।
सबसे ज्यादा मेडिकल कॉलेज के पास टूट रहा स्थायी निर्माण
राजकीय मेडिकल कॉलेज संचालित होने की वजह से वहां रोजगार की संभावनाएं बढ़ गईं थीं। इसकी वजह से लोगों ने अपनी-अपनी जगहों पर सुविधा अनुसार स्थायी निर्माण कराके व्यापार करना शुरू कर दिया था। लेकिन बरेली-मथुरा राष्ट्रीय राजमार्ग के चौड़ीकरण के चलते वह जद में आ गए। ऐसे में वहां पर चार तीन मंजिला घर समेत 11 मेडिकल स्टोर की दुकानों के अलावा चाय-समोसे की दुकानें भी हैं।
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वर्जन
बरेली-मथुरा राष्ट्रीय राजमार्ग के चौड़ीकरण को लेकर कुछ जगह अधिग्रहण किया गया है। उसके तहत संबंधित को मुआवजा दे दिया है। एक माह के अंदर निर्माण तोड़ने का निर्देश दिए हैं। अधिकांश लोग स्वयं ही अपना निर्माण तोड़ रहे हैं। समय अवधि पूरी होने के बाद में आगे की कार्रवाई की जाएगी।
-उत्कर्ष शुक्ला, परियोजना निदेशक, एनएचएआई
राजकीय मेडिकल कॉलेज के पास तोड़ा जा रहा स्थायी निर्माण। संवाद
राजकीय मेडिकल कॉलेज के पास तोड़ा जा रहा स्थायी निर्माण। संवाद