उझानी। बेमौसम चल रही पछुवा हवा ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। खेतों में नमी कम हो जाने से गेहूं की रंगत उड़ाने के साथ ही सरसों की फसल को भी चपेट में ले लिया है। समय से पहले दोनों फसलें पकीं तो पैदावार घट सकी है।
गेहूं की फसल को सबसे ज्यादा नुकसान लेट बोआई होने की वजह से है। दिसंबर की शुरूआत में जिन खेतों में गेहूं की बोआई हो गई थी, वह तो पछुवा हवा चलने से कम नुकसान में हैं, लेकिन जनवरी में बोआई वाले खेतों में गेहूं ने बढ़वार ही देर से पकड़ी है। इसके बाद दो बार सिंचाई भी हो चुकी है।
तीसरी बार सिंचाई शुरू हो पाती इससे पहले ही पछुवा हवा ने खेतों की नमी अपने आगोश में समेटनी शुरू कर दी है। किसानों का मानना है कि नमी कम हो जाने से गेहूं की बालियों में दाना समय से पहले ही सूख सकता है। ऐसे में अगर सिंचाई कर दी जाए तो हवा की चपेट में आकर फसल गिर जाएगी। इसी तरह सरसों के खेतों की दशा देख किसान सकते में पड़ गए हैं।
बुर्राफरीदपुर के यशपाल सिंह ने बताया कि खेतों में नमी कम हो जाने से सरसों सूखने लगी है। फली सूखने से दाना कमजोर पड़ गया है। इसका सीधा असर पैदावार पर पड़ेगा। सरसों का अधिकतर रकबा इसकी चपेट में है। बता दें कि पछुवा हवा अमूमन होलिका दहन के बाद चलती है। तब गेहूं पक रहा होता है। उस वक्त फसल को अधिक तापमान की आवश्यकता होती है।
गोभी की बहार गई... कद्दू वर्गीय सब्जियों को भी नुकसान
सब्जियों का राजा आलू तो पकने के कगार पर है। जानकार बताते हैं कि पछुवा हवा का आलू पर असर नहीं पड़ेगा। वह और अच्छी तरह पककर अच्छी गुणवत्ता का तैयार होगा। सब्जियों में गोभी खेतों में आठ-नौ फीसदी रकबा में ही बची है। थोक बाजार भाव में तेजी से गिरावट के बाद किसान खेतों में गोभी जोत भी चुके हैं, लेकिन लौकी और कद्दू के खेतों में नमी कम हो जाने से अधिक सिंचाई करनी होगी। समय रहते सिंचाई नहीं की तो इन सब्जियों की फसल सूखने लगेगी।
पछुवा हवा चलने से फसलों को नुकसान पहुंचा है। हवा एक-दो दिन में थम जाती है तो ज्यादा नुकसान नहीं होगा। किसानों को गेहूं की फसल में सिंचाई करने से पहले हवा थमने का इंतजार करना चाहिए। तेज हवा से फसल गिर सकती है। - डॉ. संजय कुमार, कृषि वैज्ञानिक