आमान परिवर्तन के काम का जायजा लेने सोमवार को पहुंची पूर्वोत्तर रेवले निर्माण संगठन और मंडल की टीम की स्पेशल ट्रेन को मोहम्मदपुर ब्यौर फाटक पर गुस्साए ग्रामीणों ने रोक लिया। वह फाटक बंद करने का विरोध जताते हुए तुरंत निर्णय लिए जाने के फैसले पर अड़ गए। करीब घंटे भर की तकरार के बाद अधिकारियों से आश्वासन मिला, तब ट्रेन आगे बढ़ सकी, लेकिन इसके बाद भी 267 समपार पर ठोस निर्णय नहीं निकला।
रेल अधिकारियों की मानें तो जिस मानव रहित समपार को ग्रामीण बंद करने का विरोध कर रहे हैं, वह समपार बंद होगा। हालांकि इसके नजदीक से सहूलियत प्रदान की जाएगी। ब्राडगेज लाइन की प्रगति का जायजा लेने ओपन लाइन इंजीनियर्स के साथ रामगंगा-कासगंज के रूट पर निकली एनईआर की निर्माण संगठन मुख्यालय और मंडल की टीम में शामिल मुख्य संरक्षा अधिकारी एनके अंबिकेश, मुख्य ट्रैक इंजीनियर एससी श्रीवास्तव, डीआरएम प्रमोद जिंदल, मुख्य वाणिज्य प्रबंधक एसी लाठे आदि ने रास्ते में पड़ने वाले स्टेशनों को देखा। जहां काम अधूरा था, वहां पूरे कराने के निर्देश दिए। साथ में इंजीनियर्स भी थे। वहीं जब स्पेशल ट्रेन जैसे ही बिनावर थाना क्षेत्र के गांव मोहम्मद ब्यौर पहुंची तो पहले से धरना दे रहे ग्रामीण और भाकियू कार्यकर्ताओं नेताओं ने ट्रेन को रोक लिया। महीने भर से प्रदर्शन कर रहे गुस्साए ग्रामीण पटरी पर आ गए। फाटक बंद करने का विरोध करने लगे। ग्रामीणों ने कहा कि वह फाटक पर तुरंत निर्णय लें। करीब घंटे भर आश्वासन और समझाने का दौर चलता रहा, लेकिन ग्रामीणों ने एक न सुनी। इस बीच रेल अफसरों और ग्रामीणों के बीच तकरार भी हुई। बाद में फाटक को करीब 250 मीटर मोहम्मदपुर ब्यौर की तरफ बढ़ाए जाने पर आश्वासन दिया गया। ग्रामीणों ने इसका भी विरोध किया। वे वहीं रास्ता रखे जाने पर अड़ रहे, लेकिन डीआरएम व अन्य अधिकारियों के समझाने के बार 250 मीटर फाटक गांव की तरफ के आश्वासन पर बाद में सहमति जताने लगे।
बताते हैं कि फिर भी कई ग्रामीण खिलाफ में नजर आए। इसके बाद स्पेशल ट्रेन को रवाना किया गया। मौके पर एक दर्जन गांव के सैकड़ों लोग मौजूद रहे। स्थानीय पुलिस के अलावा रेलवे के अधिकारी, रेल पुलिस, एसडीएम सदर प्रदीप यादव आदि भी यहां पहुंचे।
सैकड़ों महिलाएं भी पटरी पर बैठी रहीं
मोहम्मदपुर ब्यौर समपार के विरोध में जहां पुरुष प्रदर्शन में शामिल थे। वहीं दर्जनों गांवों की सैकड़ों महिलाएं भी चूल्हा-चौका छोड़ आंदोलन का हिस्सा बनीं। जब तक डीआरएम एनईआर से वार्ता चलती रही। तब तक महिलाएं और साथ में बच्चे भी पटरी पर बैठी रहीं। आश्वासन के बाद ही जाने दिया।
महाप्रबंधक की भी घेरी थी ट्रेन
बदायूं। इससे पहले निरीक्षण पर आए पूर्वोत्तर रेलवे के महाप्रबंधक की ट्रेन भी ग्रामीणों ने घेरते हुए फाटक बंद करने का विरोध जताते हुए ज्ञापन दिया था। पर कोई ठोस निर्णय उस वक्त भी नहीं निकाला गया था। इस बात का गुस्सा भी सोमवार को नजर आया।