बिसौली। वजीरगंज-आंवला रोड पर स्थित मां राजेश्वरी मंगला माता का प्राचीन मंदिर श्रद्धा, आस्था और विश्वास का अद्भुत संगम है।
मुख्य मार्ग से लगभग 150 मीटर दूर स्थित इस भव्य मंदिर में माता की मूर्ति पृथ्वी के गर्भ से स्वयं प्रकट हुई मानी जाती है। ग्रेनाइट के काले पत्थर की इस दिव्य प्रतिमा में मां महाकाली, महालक्ष्मी और सरस्वती का संयुक्त स्वरूप विराजमान है। साथ ही यहां 50 से अधिक अन्य देवी देवताओं की प्रतिमाएं स्थापित हैं। मंदिर परिसर में स्थित प्राचीन पीपल (ब्रह्मदेव) का वृक्ष, इस स्थल के गौरवशाली इतिहास का साक्षी है।
प्रत्येक सोमवार को यहां भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है, वहीं चैत्र माह में लगने वाले भव्य मेले से दो दिन पूर्व तेरस के दिन क्षेत्रवासी परिवार सहित पूजन अर्चन करने पहुंचते हैं। मेले का आयोजन नगर पंचायत की देखरेख में भव्य रूप से किया जाता है। मंदिर के विकास में सर्वराज सिंह, भूपेंद्र दादा, राइस अहमद अंसारी, सुरेश शर्मा, महेश चंद्र गुप्ता और मोहम्मद उमर कुरैशी का विशेष योगदान रहा है।
बरी बाबा के दर्शन से पूर्ण होती है यात्रा
मंदिर से लगभग 150 मीटर दूर स्थित बरी बाबा का सैकड़ों वर्ष पुराना विशाल वृक्ष श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। मान्यता है कि माता के दर्शन तभी पूर्ण माने जाते हैं जब बरी बाबा के दर्शन भी किए जाएं। दयाराम व रामावतार माली का परिवार पीढ़ियों से माता की सेवा में समर्पित है।
चुनरी चोला चढ़ाने की परंपरा
माता की प्रतिमा सिंदूर, रोली, चंदन और सुगंधित तेल से सजे चोले से अलंकृत रहती है। भक्त अपनी मनोकामना पूर्ण होने पर यहां चुनरी और चोला चढ़ाते हैं। बुजुर्गों ने बताया, द्वापर युग में पांडवों ने अज्ञातवास के दौरान यहां कुछ समय व्यतीत किया था।
इतिहास में बसी वीरता और प्रेम कथा
बुजुर्ग डॉ. महेंद्र पाल वार्ष्णेय ने बताया 1150 से 1250 ईस्वी के बीच यह क्षेत्र बिशनगढ़ के नाम से जाना जाता था। राजा गजराज की पुत्री गजमोतिन और वीर मलखान की प्रेम कथा यहां प्रसिद्ध है। एक समय राजा ने मलखान को बंदी बनाकर इसी मंदिर में बलि देने का प्रयास किया, लेकिन वीर आल्हा ऊदल ने युद्ध कर उसे मुक्त कराया।
राजराजेश्वरी मंगला माता मंदिर पर मेला आज से
वजीरगंज। राज राजेश्वरी मंगला माता मंदिर पर चैती मेला बृहस्पतिवार दो अप्रैल से शुरू होने जा रहा है। शुभारंभ बुधवार सुबह विधिवत पूजा-अर्चना, वन पूजन, ध्वजारोहण एवं अखंड ज्योति प्रज्ज्वलन के साथ किया गया। इसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। मेला 15 दिन चलेगा। दूर-दराज क्षेत्रों से श्रद्धालु माता के दरबार में पहुंचना शुरू हो गए हैं। बच्चों के मनोरंजन के लिए झूले व विभिन्न प्रकार की दुकानों की भी व्यवस्था की गई है। स्थानीय प्रशासन और मेला समिति द्वारा सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। मंदिर परिसर में पुलिस बल की तैनाती के साथ साफ-सफाई और अन्य सुविधाओं पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। संवाद