मुख्यमंत्री की प्राथमिकता के कार्यक्रम को मिला धोखा‘
हंड्रेड एकड़ पौधारोपण’ के तहत 17500 पौधे लगे, 2063 पौधे ही मिले
पौधारोपण चूंकि मुख्यमंत्री की प्राथमिकता वाले कार्यक्रम से जुड़ा है, सो अधिकारी इस पौधारोपण को पौधे सूख जाने की स्थिति में लाना चाहते हैं। अगर, मान लिया जाए कि पौधे सूख गए हैं, तब भी इतनी बड़ी संख्या में पौधे सूख जाने को वन विभाग की जिम्मेदार है।
वर्ष 2014 में मुख्यमंत्री की प्राथमिकता वाली योजना ‘हंड्रेड एकड़ पौधारोपण’ के तहत 17500 पौधे बदायूं-मेरठ मार्ग पर लगवाए गए थे। इन पौधों का संरक्षण पहले से ही वांछित था। एसडीओ ईश्वर दयाल ने पौधे न सूखें, इसके लिए रेंज के अधिकारियों और डीएफओ को जानकारी देते रहे। वन संरक्षक तक यह बात पहुंचती रही लेकिन वन विभाग ने उदासीनता दिखाई। मामला बढ़ने पर मंडलीय अधिकारियों ने एसडीओ ईश्वर दयाल के नेतृत्व में एक जांच टीम गठित की। इसमें डीएफओ के अलावा क्षेत्रीय वन अधिकारी सत्येंद्र कुमार, जगन्नाथ प्रसाद, प्रदीप कुमार वर्मा शामिल रहे। अन्य स्टाफ की सहायता से पौधारोपण योजना की जांच की गई 16-17 नवंबर को की गई जांच की रिपोर्ट टीम के मुखिया ने डीएफओ और वन संरक्षक को भी दे दी गई।
एसडीओ ने स्वीकारा है कि बड़ी संख्या में पौधे लगे नहीं पाए गए हैं। बताया जाता है कि बदायूं-मेरठ राजमार्ग पर किमी 162 से 180 के बीच पौधारोपण में घपला है। 17500 पौधों में से मात्र 2063 पौधे ही मिले हैं। इस बीच सितंबर में रेंजर संजय रस्तोगी ने चार्ज ले लिया है। इन्हें 95 प्रतिशत पौधारोपण संरक्षित लिखकर चार्ज दिया गया है। पौधों के संरक्षण समेत सभी मद में एक करोड़ से अधिक का धन भी खर्च कर दिया गया है। डीएफओ समीर कुमार का कहना है कि
बदायूं-मेरठ राजमार्ग पर पौधारोपण में इतनी मात्रा में पौधे न मिलने की रिपोर्ट आई है। इस संबंध में वन संरक्षक को भी रिपोर्ट भेजी गई है। उच्चाधिकारियों के संज्ञान में मामला है। वह इस पर क्या करते हैं, बताया जाएगा। जबकि वन संरक्षक वीेके चोपड़ा ने बताया कि जांच रिपोर्ट उन्हें मिली है। पौधारोपण को संरक्षित करने को धन न मिल पाने के कारण कठिनाई आई थी। बारिश भी कम हुई। इसके बावजूद भी देखा जाएगा कि इतनी बड़ी संख्या में पौधे कैसे नष्ट हुए। जांच रिपोर्ट का मनन कर जिम्मेदारी तय की जाएगी। अगर, कोई दोषी होगा तो कार्रवाई भी होगी।