उझानी। श्रीरामलीला महोत्सव में दिन में चल रही रासलीला में वृंदावन के कलाकारों ने मार्ग दान की लीला का मंचन कर दर्शकों का मन मोह लिया। रास्ता रोके जाने पर ब्रज की सखियों ने कान्हा को पहले तो समझाने की कोशिश की, वह नहीं माने तो मार्ग दान मांगकर बरसाना कूच कर दिया।
ब्रज में मार्ग दान की लीला का महत्व समझाते हुए मंडली के मुखिया मुकेश हरि शर्मा ने कहा कि रासलीला में यह प्रसंग काफी रोचक है। ब्रज की महिलाएं और सखियां दूध, दही और माखन लेकर गोकुल और वृंदावन के रास्ते बरसाना जाती हैं। उन्हें पता होता है कि कान्हा को माखन पसंद है। फिर भी वह उसी रास्ते से होकर निकलती है, जहां कान्हा की नजर सखियों पर पड़ जाए।
कलाकारों ने इसी प्रसंग का जीवंत मंचन किया। सखियां दही- माखन लेकर आपस में बात करती हुईं गोकुल के रास्ते निकलीं तो कान्हा ने उन्हें रोक लिया। सखियों के मान- मनुहार करने पर कान्हा उन्हें मार्ग दान का आशीर्वाद देते हैं। रासलीला के इस प्रसंग के मंचन के दौरान अग्रवाल महिला समिति की अध्यक्ष सुनीता बंसल और महामंत्री शालिनी सिंघल की मौजूदगी में महिलाओं ने राधा-कृष्ण बने कलाकारों की आरती उतार कर उनका पूजन किया। अग्रवाल सेवा समिति के पदाधिकारियों में रमेशचंद्र बंसल और राजीव गोयल ने प्रसाद वितरण कराया।
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श्रीराम ने तोड़ा शिव धनुष, सीता ने डाली वरमाला
उझानी में रामलीला महोत्सव में दिन में रासलीला और रात में रामलीला के मंचन की दशकों पुरानी परंपरा रही है। रामलीला में बृहस्पतिवार रात कलाकारों ने धनुष यज्ञ की लीला का मंचन किया। मुनि विश्वामित्र के साथ जनकपुरी पहुंचे श्रीराम और लक्ष्मण ने भी स्वयंवर में हिस्सा लिया। बड़े-बड़े राजा-महाराजा जब शिव धनुष को तनिक भी हिला नहीं पाए तो मुनि का आशीर्वाद प्राप्त कर श्रीराम ने धनुष तोड़ दिया।
सीता ने उनके गले में वरमाला डाली तो पूरा पांडाल जय श्रीराम से गूंज उठा। रामलीला महोत्सव आयोजन कमेटी के अध्यक्ष सचिन अग्रवाल ने बताया कि रामलीला का मंचन करने वाले कलाकार ही रासलीला में किरदार निभाते हैं।
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श्रीराम ने ताड़का का वधकर ऋषियों को दिलाई आतंक से मुक्ति
बिल्सी। मोहल्ला संख्या छह स्थित रामलीला मैदान में चल रहे रामलीला मेले में बुधवार रात ताड़का वध की लीला का मंचन हुआ। मंचन में दर्शाया गया कि महर्षि विश्वामित्र भगवान श्रीराम और लक्ष्मण को अपने साथ वन में ले जाते हैं। वहां यज्ञ में बाधा डालने वाली राक्षसी ताड़का का सामना होता है। महर्षि विश्वामित्र की आज्ञा पर भगवान श्रीराम ताड़का का वध कर ऋषियों को उसके आतंक से मुक्ति दिलाते हैं। संवाद
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राम जन्म से ताड़का वध तक की लीला का हुआ मंचन
आसफपुर। स्थानीय ग्राम आसफपुर में श्री आदर्श रामलीला कमेटी की ओर से दूसरे दिन राम जन्म से ताड़का वध तक की लीला का मंचन किया गया। भगवान राम के जन्म के बाद ऋषि विश्वामित्र राक्षसों से यज्ञ की रक्षा के लिए राजा दशरथ से राम-लक्ष्मण को मांगने आए। इस दौरान राजा दशरथ बने सुनील कटिया ने राम के प्रति अलौकिक प्रेम का ऐसा भाव दर्शाया कि दर्शक भाव-विभोर हो गए। राम का अभिनय पराग पाराशरी और लक्ष्मण का कमल दीक्षित ने किया। विश्वामित्र बने अरविंद कटिया ने अपने किरदार से दर्शकों पर अमिट छाप छोड़ी। संवाद
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दबतोरी में कैकेई-दशरथ संवाद से भावुक हुए दर्शक
दबतोरी। गांव में चल रही रामलीला में आदर्श रामलीला क्लब के कलाकारों ने रानी कैकेई के राजा दशरथ से वचन मांगने की लीला का मंचन किया। मंचन की शुरुआत राजा दशरथ द्वारा श्रीराम के राज्याभिषेक की घोषणा से हुई। राजा दशरथ बने सतेंद्र सिंह एडवोकेट ने अपनी व्याकुलता और दुख को सजीव तरीके से पेश किया। दशरथ के गिड़गिड़ाने और मूर्छित होने के दृश्य ने दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया। इस दौरान अरुण सिंह, मिंटू चौहान, अनमोल चौहान, डॉ. अतुल, रामवीर पाठक आदि मौजूद रहे। संवाद
बिल्सी में ताड़का का मंचन करता कलाकार। संवाद- फोटो : विभाग
बिल्सी में ताड़का का मंचन करता कलाकार। संवाद- फोटो : विभाग