जिला अस्पताल में मरीजों का इलाज करते डॉक्टर। संवाद
बदायूं। सर्दी का असर बढ़ने के साथ ही जिला अस्पताल में डिहाइड्रेशन के मरीजों की संख्या बढ़ गई है। आमतौर पर लोगों को लगता है कि पानी की कमी सिर्फ गर्मी में होती है, लेकिन डॉक्टरों के मुताबिक ठंड का मौसम भी शरीर से तरल पदार्थ तेजी से कम कर देता है। ठंड के कारण प्यास कम लगती है, लोग पानी पीने में लापरवाही करते हैं और इसका असर सीधे शरीर की ऊर्जा व त्वचा पर पड़ता है।
जिला अस्पताल में एक सप्ताह में कमजोरी, सिरदर्द, चक्कर आना और त्वचा रूखी होने जैसी शिकायतों वाले मरीज तेजी से बढ़े हैं। फिजिशियन डॉ. एसएम कमल का कहना है कि ठंड में लोग दिनभर में बहुत कम पानी पीते हैं, जिससे ब्लड सर्कुलेशन पर भी असर पड़ता है और शरीर में इलेक्ट्रोलाइट की कमी होने लगती है।
अस्पताल के ओपीडी में अब रोजाना करीब 100 मरीज इसी समस्या को लेकर पहुंच रहे हैं। इनमें अधिकतर युवा और बुजुर्ग शामिल हैं। त्वचारोग विशेषज्ञ डॉ. श्रीपाल के मुताबिक ठंड में भी शरीर को उतना ही पानी चाहिए जितना गर्मी में। ठंडी हवा से त्वचा और होंठ जल्दी सूखने लगते हैं और शरीर अंदर से पानी गंवाता रहता है। लेकिन, लोगों को प्यास महसूस नहीं होती।
यही वजह है कि बच्चे और बुजुर्ग इन दिनों तेजी से प्रभावित हो रहे हैं। उनका कहना है कि मौसम चाहें जैसा भी हो, दिनभर में 2 से 2.5 लीटर पानी जरूर पीना चाहिए। इसके अलावा सूप, नारियल पानी, हर्बल चाय व तरल पदार्थों का सेवन बढ़ाने की आवश्यकता है। अस्पताल प्रशासन ने भी लोगों को जागरूक करने के लिए सलाह जारी की है कि ठंड के मौसम में पानी पीने में लापरवाही न करें। सीएमएस डॉ. अमित वार्ष्णेय का कहना है कि समय पर पानी न पीने से न केवल कमजोरी बढ़ती है, बल्कि माइग्रेन, लो बीपी और किडनी से जुड़ी समस्याएं भी शुरू हो सकती हैं।