बगरैन की राम लीला में दशरथ के शव के पास विलाप करती रानी। संवाद
बदायूं। बगरैन के पेपल गांव की रामलीला के प्रभावी मंचन ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। राम के वन गमन के बाद दशरथ राम-राम रटते हुए व्याकुल हो रहे हैं, जैसे बिना पंखों के पक्षी व्याकुल होकर तड़पता है। पार्श्व से चौपाई गूंजती है- राम-राम रट बिकल भुआलू, जनु बिनु पंख बिहंग बेहालू। इसी दशा में उनकी मृत्यु हो जाती है। राज दरबार में हाहाकार मचा है। पूरी अयोध्या में शोक की लहर फैल गई है। यह दृश्य देख दर्शकों के भी आसूं निकल आए।
प्राचीन शिव मंदिर में समाज कल्याण आदर्श कमेटी की ओर आयोजित रामलीला में श्रीराम के वन गमन और पुत्र वियोग में राजा दशरथ के प्राण त्यागने के दृश्य पर दर्शक भी दुखी हो गए। कुछ इतने भावुक हुए किए रोने लगे। इससे पूर्व रामायण के अन्य प्रसंगों की लीला का मंचन किया गया। प्रभावी और आकर्षक मंचन देखने लोग भारी संख्या में पहुंच रहे हैं। महिलाओं की भी अच्छी संख्या रहती है। मंचन के समय रामलीला अध्यक्ष दुष्यंत सिंह, मुकेश भदौरिया, योगेश चौहान, निर्दोष श्रीमाली, मुनीश शर्मा, रामनरेश शर्मा, नीलेश सिंह, रजत चौहान, जगन्नाथ शर्मा, विनय सिंह, राजेश शर्मा आदि मौजूद थे।