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Budaun News: शोपीस बना प्लांट, 60 हजार की जिला अस्पताल ने खरीदी ऑक्सीजन

Sun, 07 Jul 2024 05:14 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
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बदायूं। जिला अस्पताल में 93 लाख की लागत से स्थापित किया गया ऑक्सीजन प्लांट अब शोपीस बनकर रह गया है। सर्विस के लिए ढाई लाख रुपये खर्च होने हैं। ऐसे में यह प्लांट पांच माह से ठप पड़ा हुआ है। मरीजों के इलाज के लिए अस्पताल प्रशासन ने पांच माह में 60 हजार रुपये की ऑक्सीजन खरीदी है।
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शासन ने प्लांट लगाकर 116 बेडों तक पाइप लाइन के जरिये ऑक्सीजन मरीजों तक पहुंचाने की व्यवस्था की थी। अनदेखी के चलते पाइप लाइन बंद होने व प्लांट में तकनीकी खराबी आने से पांच माह से व्यवस्था चरमराई हुई है। मरीजों को ऑक्सीजन की जरूरत पड़ने पर कर्मचारी कमरे से सिलिंडर लेकर दौड़ लगाते हैं।

महीने में करीब 80 छोटे और पांच बड़े सिलिंडर बरेली से खरीदे रहे हैं। छोटे सिलिंडर की सरकारी कीमत 150 रुपये जबकि बड़े की कीमत 400 रुपये है। पांच माह में 400 छोटे और 25 बड़े सिलिंडर खरीदकर मरीजों को इलाज दिया गया है। पांच माह में 60 हजार रुपये की गैस जिला अस्पताल प्रशासन ने खरीदी है।
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कई मरीज देरी का खामियाजा भी भुगत रहे हैं। प्लांट की सर्विस होनी है, जिसके लिए शासन से ढाई लाख रुपये की मंजूरी भी मिल चुकी है। इंजीनियर पांच माह में भी सर्विस पूरी नहीं कर सके हैं। यही कारण है कि गैस खरीदनी पड़ रही है। जिला अस्पताल में रोजाना करीब एक हजार से अधिक मरीज आते हैं। अस्पताल में करीब 10 से 15 मरीजों को ऑक्सीजन की जरूरत हर रोज रहती है। पिछले पांच माह से ऑक्सीजन की जरूरत पड़ने पर सिलिंडर और कंसंट्रेटर से आपूर्ति की जा रही है।


ऑक्सीजन सिलिंडर लाने में लगता है समय
वार्ड में भर्ती मरीज सोनपाल ने बताया कि सांस की दिक्कत होने पर परिवार वालों ने जिला अस्पताल में भर्ती किया था। शुक्रवार की रात को उनकी हालत बिगड़ी तो डॉक्टर ने ऑक्सीजन लगाने को कहा। करीब आधा घंटे बाद ऑक्सीजन सिलेंडर आया तब लगाया गया। भर्ती मरीज की देखरेख न होने की वजह से प्राइवेट में लेकर जा रहे हैं।

एक घंटे तक नहीं मिला ऑक्सीजन सिलिंडर

इस्लामनगर क्षेत्र से आए महावीर सिंह ने बताया कि शुक्रवार दोपहर 12 बजे पिता को लेकर अस्पताल आए। उनको सांस में दिक्कत थी। ऑक्सीजन की आवश्यकता थी। करीब एक घंटे के बाद ऑक्सीजन सिलिंडर लगाया जा सका। हालत में सुधार नहीं है अब प्राइवेट में लेकर जा रहे हैं।

ऐसे काम करता है प्लांट
प्लांट में ऑक्सीजन लिक्विड फाॅर्म तैयार होती है। जिसे 10,000 लीटर की क्षमता वाले टैंक में स्टोर किया जाता है। मरीजों तक ऑक्सीजन की सप्लाई पहुंचाने को पाइपलाइन बिछी हुई है। टैंक खाली होने पर फिर से प्लांट के जरिए इसे भरा जाता है।


ऑक्सीजन प्लांट खराब है। प्लांट सही कराने के लिए शासन को कई बार पत्र लिखा जा चुका है। हालांकि, अस्पताल में ऑक्सीजन सिलिंडर और कंसंट्रेटर की कमी नहीं है। इंजीनियर आए और ठीक भी किया, लेकिन सही से अभी प्लांट चल नहीं रहा है। इंजीनियर को फिर से बुलाने के लिए प्रक्रिया चल रही है। जब तक ठीक नहीं हो जाता तब तक बरेली से गैस को खरीदा जा रहा है।
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- डॉ. कप्तान सिंह, सीएमएस
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