बदायूं। देश आजादी का 79वां स्वाधीनता दिवस मनाने जा रहा है। इसकी तैयारी धूमधाम से चल रही है। ऐसे में आजादी के वक्त पाकिस्तान से आए लोगों में बंटवारे की यादें ताजा हो गई हैं। उस दौरान पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के मुल्तान जिले के सूजाबाद से आई पुष्पा शर्मा ने यादें साझा की है। उन्होंने बताया कि बंटवारे का जो दर्द झेला, आज उसकी कल्पना मात्र से सिहरन हो जाती है।
उन्होंने बताया कि बंटवारे के समय फरमान जारी हुआ कि पाकिस्तान के हिन्दू भारत जा सकते हैं। ऐसे में जमीन-मकान का मोह छोड़कर वह भारत आने को तैयार हो गईं। वह आठ भाई बहन थे और उनके पिताजी चार भाई थे। सभी साथ रहते थे। पिता के साथ-साथ दादा-दादी भी थे। बंटवारे के दौरान सबको वहां से भागना पड़ा। हिंदुस्तान आते-आते सभी बिछुड़ गए। वह पति के साथ भटकते हुए बदायूं तक आ गई। इन सबको बंटवारे के बाद सुरक्षित हिंदुस्तान लाना किसी युद्ध जीतने से कम नहीं था।
आजादी से पहले जो अपने थे वह सब बदल गए। वहां घर और दुकानों पर उनके नौकरों ने कब्जा कर लिया। बड़ी मुश्किल से जान बचाकर सूजाबाद से फिरोजपुर के कसेर होते हुए भारत पहुंची। पूरे सफर में उनका दम मानों घुटता रहा। चंद समय में ही सब कुछ बदल गया। रुंधे गले से उन्होंने अपने को संयमित करते हुए कहा कि यहां आने के बाद सब कुछ सामान्य हो गया है। आंसुओं के बीच कभी ऐसे मौकों पर ही पुरानी यादें बस एक बुरे सपने के रूप में दिलो दिमाग में तैर जाती हैं। जब कभी भारत और पाक की बात आती है और जंग या आजादी जैसा शिगूफा छोड़ा जाता है। वह प्रार्थना करतीं हैं कि ऐसा मंजर वह कभी न देखें। अब हिंदुस्तान ही अपना है, यहां अपने परिवार के साथ सुख से रह रही हैं। पुष्पा शर्मा का कहना है कि अब वह शहर के पंजाबी मंदिर के पीछे परिवार के साथ रह रहीं है। उनके बेटे संजय शर्मा रजिस्ट्री दफ्तर में डीड राइटर हैं। अब वह पाकिस्तान का नाम भी नहीं लेना चाहती। आज तक वह बिछड़े हुए परिवारों से नहीं मिल सकीं हैं, इसका हर समय उनको दुख रहता है।