बदायूं। मध्य प्रदेश के इंदौर में दूषित पेयजल से हुई मौतों की घटना के बाद जहां कई नगर निकाय सतर्क हो गए, वहीं, बदायूं नगर पालिका पर इसका कोई असर दिखाई नहीं दे रहा। शहर में पानी की आपूर्ति करने वाले ओवरहेड टैंकों की हालत पड़ताल में बेहद खराब पाई गई। पाया गया कि कई टैंकों की सफाई तीन साल से नहीं कराई गई है। वहीं पानी को शुद्ध करने वाले क्लोरीन डोजर भी खराब पड़े हैं।
शहर में 32 ट्यूबवैल हैं, जिनसे नहारखां सराय, मीराजी चौकी, आंबेडकर छात्रावास, वाटरवर्क्स, डीएम आवास के पास, गोपी चौक, घंटाघर वाले ओवरहेड टैंकों से करीब तीन लाख की आबादी को रोजाना पानी की आपूर्ति की जाती है। दुविधा ये है कि इन ओवरहेड टैंकों की सफाई काफी समय से नहीं हुई है। इसकी वजह से उसमें गंदगी, काई और जंग की परत जमी हुईं हैं। इनको साफ करने के बजाय वैसे ही रोजाना हजारों लोगों को पीने का पानी आपूर्ति किया जा रहा है।
पानी की नियमित जांच और शुद्धिकरण की भी कोई व्यवस्था न होने से लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। बच्चे, बुजुर्ग और गर्भवती महिलाएं दूषित पानी पीने से बीमारियों का शिकार हो सकते हैं।
तीन साल पहले हुई थी सफाई
डॉ. भीमराव आंबेडकर छात्रावास के पास में स्थित ओवरहेड टैंक के हालात बेहद खराब हैं। यहां पर ओवरहेड टैंक की सफाई 2022 में हुई थी। इसके बाद कभी सफाई नहीं कराई गई। तीन साल से बिना साफ हुए ओवरहेड टैंक के माध्यम से घरों में पानी की सप्लाई की जा रही है।
नाम के लिए लगा दिए हैं क्लोरीन डोजर
नगर पालिका की ओर से पानी की सफाई के लिए क्लोरीन डोजर लगाए गए हैं, ताकि लोगों को शुद्ध पेयजल की आपूर्ति हो सके। अधिकारियों की अनदेखी के चलते ये क्लोरीन डोजर सालों से खराब पड़े हैं। जब लगाए गए थे, तब कुछ माह ही इन्हें उपयोग में लाया जा सका था। ओवरहेड टैंकों पर क्लोरीन की दवा भी काफी समय से नहीं है। केवल दिखाने के लिए खाली केन रखी हुई है।
गोपी चौक पर सीढि़यां ही खराब, कैसे हो सफाई
शहर के गोपी चौक पर स्थित ओवरहेड टैंक की सीढि़यां लंबे समय से क्षतिग्रस्त हैं। ऐसे में ओवरहेड टैंक को साफ करने के लिए कर्मचारियों को चढ़ने में परेशानी होगी। घंटाघर, गोपी चाैक समेत कई ओवरहेड टैंकों की सफाई चार साल से अधिक समय बीतने के बाद भी नहीं कराई जा सकी है।
सिर्फ बिल वसूल रही नगर पालिका
शहर के निवासी माेहित कुमार का कहना है कि इंदौर में इतना बड़ा हादसा हो गया, फिर भी यहां कोई सतर्क नहीं है। नगर पालिका सिर्फ बिल वसूलने में आगे रहती है, लेकिन लोगों की सेहत की जिम्मेदारी कोई नहीं लेता। राजेश ने बताया कि जब कोई व्यक्ति नागरिक सुविधाओं की बात की जाए, तो नगर पालिका प्रशासन इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है। केवल खाना पूर्ति की जा रही है।
यह है नियम
- साल में कम से कम एक बार या तीन से छह माह में ओवरहेड टैंक खाली कराकर सफाई कराई जानी चाहिए।
- दीवाराें और फर्श में चिपकी गंदगी, काई और जंग की परत को हटाया जाना चाहिए।
- ब्लीच या पोटेशियम परमैग्नेट से ओवरहेड टैंक को कीटाणु रहित करना चाहिए।
नियमित रूप से ओवरहेड टैंक की सफाई कराई जाती है। क्लोरीन डोजर सभी जगहों पर लगे हैं, वह काम भी कर रहे हैं। अगर कहीं पर काम नहीं कर रहे तो उनको दिखवाया जाएगा। वाटर वर्क्स में बना नया ओवरहेड टैंक जनवरी के अंत तक शुरू हो जाएगा। - सचिन सक्सेना, जलकल अभियंता, नगर पालिका परिषद
शहर के मीराजी चौकी पर स्थित ओवरहेड टैंक। संवाद
शहर के मीराजी चौकी पर स्थित ओवरहेड टैंक। संवाद
शहर के मीराजी चौकी पर स्थित ओवरहेड टैंक। संवाद