बदायूं। सड़क सुरक्षा समिति की बैठकों में कागजी निर्देश और दावे होते रहे। यही कारण रहा है कि बदायूं अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के एक्सीडेंट जोन में शामिल हो चुका है। प्रदेश में 2025 में सर्वाधिक हादसे वाले जिन 20 जिलों को चिह्नित किया गया है, उसमें बदायूं 18वें नंबर पर है। इस साल जनवरी से अगस्त तक हादसों में मरने वालों की संख्या 14 फीसदी बढ़ गई।
जिले में शायद ही कोई दिन ऐसा होगा जिस दिन हादसे में किसी की जान न गई हो। महीने में औसतन 30-32 लोगों की मौत हो रही है। जनवरी से अगस्त तक 2025 में 280 हादसों में 240 लोगों की जान चली गई थी। इसके बाद जिले को हाईअलर्ट घोषित कर दिया गया। इसके बाद से जिले में चेकिंग अभियान चले।
लोगों को जागरूक किया गया, लेकिन जिले में हादसों में कमी नहीं आई और न मरने वालों की संख्या में कमी आ सकी है। इसका आंकड़ा एकाएक काफी बढ़ गया। इस साल जनवरी से अगस्त तक के आंकडों की बात करें तो 282 हादसों में 274 लोगों की जान चली गई। यह हाल तब है जब जिले में सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में हादसों को रोकने के लिए हर बार रणनीति बनती है, लेकिन इसका कोई नतीजा सामने नहीं आता है। (संवाद)
हर माह जा रही 30 लोगों की जान
सड़क सुरक्षा के उपायों को पालन कराने और लोगों को जागरूक करने के लिए जिले में 22 थाने और यातायात पुलिस का नेटवर्क है। जिले में 2,400 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात हैं। शहर में ट्रैफिक नियंत्रण के लिए यातायात पुलिस की अलग से व्यवस्था है। इसके अलावा परिवहन विभाग भी चेकिंग अभियान चलाता है। बावजूद इसके सड़क सुरक्षा के नियमों का पालन नहीं हो पा रहा है। सबसे अधिक हादसे उझानी, वजीरगंज, बिसौली के रानेट, अलापुर, दातागंज रोड व ककराला रोड पर दर्ज किए गए हैं। हादसों में प्रतिमाह मरने वालों की संख्या 30 से अधिक है। जनवरी से अगस्त तक के आंकड़े भी यही बयां कर रहे हैं।
जिले में 42 ब्लैक स्पॉट
वर्तमान में जिले में 42 ब्लैक स्पॉट हैं। इनमें मलगांव रेलवे क्रॉसिंग, घटपुरी, बुटला दौलत, खेड़ा नवादा चौराहा, एआरटीओ चौराहा, राजकीय मेडिकल कॉलेज तिराहा, रानेट चौराहा, हतसा, ओरछी चौराहा, खंदक, उस्मानपुर, मुजरिया चौराहा, कौल्हाई, उघैनी पुलिया आदि ब्लैक स्पॉट हैं।
हादसों को रोकने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। वाहन चालकों को लगातार जागरूक करने के साथ ही उन पर कार्रवाई भी कराई जा रही है। लोगों को खुद ही इस ओर ध्यान देना होगा। एक जान जाने वाले परिवार का देखकर लोगों का सुधार करना चाहिए। अभियान चलाकर लोगों को जागरूक करने का काम किया जाएगा। अम्बरीश कुमार सिंह, एआरटीओ प्रवर्तन