बदायूं। 11 साल से चल रहे मामले में अब जेल प्रशासन ने किसानों से मामले को निपटा लिया है, लेकिन अब भी शत्रु संपत्ति का अड़ंगा है, जिससे नई जेल के निर्माण का रास्ता साफ नहीं हो सका है। एडीएम की कोर्ट में शत्रु संपत्ति को लेकर वाद चल रहा है। बताया जा रहा है कि जल्द ही मामले को निपटाकर जेल निर्माण का रास्ता साफ हाे सकता है।
जिला जेल का निर्माण 119 साल पहले कराया गया था। अब इसका भवन जर्जर हो चुका है। नई जेल के लिए 11 साल पहले शासन को प्रस्ताव भेजा गया था। मंजूरी के बाद बहेड़ी के पास जमीन मिली तो किसानों से बैनामे कराने शुरू कर दिए गए। इसी बीच 14 किसानों ने जमीन अधिग्रहण के खिलाफ कोर्ट में वाद दायर कर दिया। जेल के लिए प्रस्तावित जमीन में कुछ हिस्सा शत्रु संपत्ति का है, जो निर्माण कार्य में बाधक बन रहा है। किसानों से मामला सुलझ गया है, लेकिन शत्रु संपत्ति का मामला आज भी एडीएम कोर्ट में लंबित है।
जेल के लिए जो जमीन ली गई उसमें बीच का हिस्सा करीब 4.5 एकड़ जमीन शत्रु संपत्ति है। इसका मामला एडीएम कोर्ट में चल रहा है और वहीं से इसका निस्तारण होना है। यह संपत्ति उनकी है जो पाकिस्तान की नागरिकता ले चुके हैं। इसके लिए जेल अधीक्षक लगातार पैरवी कर रहे हैं। पैरवी रंग लाई और 14 किसानों से समझौता कर जमीन का बैनामा करा लिया गया।
पिछले साल तक जो दो किसान जिद पर अड़े थे, उनसे भी जमीन का बैनामा करा लिया गया है। अब सिर्फ प्रशासन की ओर से शत्रु संपत्ति के निस्तारण का ही इंतजार जेल प्रशासन को है। प्रशासन जितना जल्द संपत्ति का निस्तारण करा देगा उतनी ही जल्दी जेल का निर्माण शुरू हो सकेगा।
जिला कारागार में 625 के बजाय 997 बंदी और कैदी
जिला कारागार में बंदी व कैदियों को रखने की क्षमता 625 है। इस समय करीब 997 बंदी व कैदी मौजूद हैं। बंदियों की संख्या के हिसाब से बैरकें कम पड़ जाती हैं। नई जेल का निर्माण कार्य शुरू होने की उम्मीद के चलते जिला कारागार में संसाधन भी नहीं बढ़ाए जा रहे हैं।
जेल निर्माण के लिए खरीदी गई है 31 एकड़ जमीन
जेल निर्माण के लिए कुल 31 एकड़ जमीन खरीदी गई है, जिन किसानों से जमीन खरीदी गई है उन सबसे विवाद निपट गया है। अब इसी जमीन के बीच में शत्रु संपत्ति के मामले का निस्तारण होना शेष है। किसानों का मामला निपट चुका है।
किसानों से जमीन का निस्तारण हो चुका है। अब सिर्फ शत्रु संपत्ति का निस्तारण होना शेष है। उम्मीद है कि जल्द ही प्रशासन स्तर से इसका निस्तारण करा दिया जाएगा। प्रशासन ने मामले को शासन स्तर पर भेज दिया है। निस्तारण होते ही जेल के भवन का निर्माण कार्य शुरू करा दिया जाएगा। - राजेंद्र कुमार, जेल अधीक्षक