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Budaun News: जिस जेल काे फांदकर भागा सुमित, अब फिर वही बनेगी उसका ठिकाना

सार

बदायूं जिले के कुख्यात अपराधी सुमित चौधरी को एसटीएफ ने नेपाल बॉर्डर से आठ साल बाद गिरफ्तार किया। सुमित 2018 में जेल से फरार हो गया था और अब उसे कड़ी सुरक्षा में फिर उसी जेल में रखा गया है।
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एसटीएफ के हत्थे चढ़ा शातिर अपराधी सुमित चौधरी। स्रोत- पुलिस - फोटो : रामलीला मंचन करते फिल्मी कलाकार
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विस्तार
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बदायूं। सात साल पहले जिस जेल से रस्सी के सहारे कूदकर शातिर अपराधी सुमित चौधरी भाग गया था, अब पकड़े जाने के बाद उसे पुन: उसी जेल में रखा जाएगा। हालांकि इस बार सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रहेगी। बता दें कि जिला जेल में नौ ऐसे अपराधी हैं, जो शातिर अपराधी की श्रेणी में हैं। इनको कड़ी सुरक्षा निगरानी में रखा गया है। अब दसवां अपराधी सुमित चौधरी इनमें शामिल हो गया है। बृहस्पतिवार की शाम उसे कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेजा गया।
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जेलर रणंजय सिंह ने बताया कि वैसे तो जेल में रह रहे सभी अपराधियों पर कड़ी निगरानी की जाती है, लेकिन जेल में स्थानीय छह अपराधी ऐसे हैं जिनकी विशेष निगरानी की जा रही है। सभी शातिर अपराधी की श्रेणी में हैं। इसी के साथ प्रशासनिक तौर पर तीन अपराधी ऐसे हैं जिनको बाहर की जेल से यहां भेजा गया है।
कुल मिलाकर नौ शातिर अपराधी जेल में विशेष निगरानी में हैं। अब सुमित चौधरी जो कि दो लाख रुपये का इनामी बदमाश है और इसी जेल से सात साल पहले रस्सी के सहारे दीवार से कूदकर भागा था, उसको भी बृहस्पतिवार को बरेली से गिरफ्तार कर एसटीएफ की टीम ने सिविल लाइंस थाने से कोर्ट में पेश किया, जिसे जेल भेज दिया गया है।
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मुरादाबाद के सिविल लाइंस थाना क्षेत्र का रहने वाला है सुमित
सुमित चौधरी मुरादाबाद के सिविल लाइंस थाना क्षेत्र का रहने वाला है। डिलारी थाना क्षेत्र के गांव हिमांयूपुर के रहने वाले पूर्व ब्लॉक प्रमुख योगेंद्र सिंह उर्फ भूरा ने उसके भाई रिंकू चौधरी की हत्या कर दी थी। सुमित ने ठान ली थी कि भाई की हत्या का बदला लेगा। वह पहले से ही भाई के हत्यारे को मारने का प्लान बना चुका था।
23 फरवरी 2015 को भाई का हत्यारोपी योगेंद्र सिंह को कोर्ट में पेशी पर लाया गया था। सुमित चौधरी ने योगेंद्र सिंह उर्फ भूरा की पुलिस अभिरक्षा में गोलियाें से भूनकर कचहरी परिसर में ही हत्या कर दी थी। हालांकि सुमित चौधरी को पुलिस ने मौके से ही गिरफ्तार कर लिया था। सितंबर 2015 में सुमित को मुरादाबाद से बदायूं जेल शिफ्ट कर दिया गया था।
आरोपी सुमित सिविल लाइंस थाने की ओर से दीवार कूदकर 12 मई 2018 को कुख्यात अपराधी चंदन की मदद से जेल से भाग गया था। तब से पुलिस उसको तलाश रही थी, लेकिन उसका कोई सुराग नहीं मिल रहा था। एसटीएफ बरेली यूनिट ने उसे नेपाल बॉर्डर से बृहस्पतिवार को गिरफ्तार कर लिया। उस पर दो लाख रुपये का इनाम भी घोषित है। एसटीएफ ने उसे सिविल लाइंस थाने में दाखिल किया। पुलिस ने कोर्ट में पेश करने के बाद उसे जेल भेज दिया है।



दो लाख का इनाम है घोषित

जेल से भागने के बाद सुमित कभी पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ सका। उस पर इनाम घोषित किया गया था। इनाम बढ़ते-बढ़ते दो लाख रुपये तक पहुंच गया। बृहस्पतिवार को बरेली एसीएफ ने उसे नेपाल बॉर्डर से गिरफ्तार कर लिया।



लोकेशन तक नहीं ले सकी जिले की पुलिस
सुमित चौधरी जिस दिन से जेल से भागा स्थानीय पुलिस उसकी लोकेशन तक ट्रेस नहीं कर सकी। हार मानकर पुलिस बैठ गई। भले स्थानीय पुलिस उसको गिरफ्तार न कर सकी हो, लेकिन एसटीएफ ने आखिर उसे पकड़ ही लिया।



यह शातिर अपराधी बदायूं जेल में हैं बंद
श्रीराम, चांद मोहम्मद, हरेंद्र उर्फ हनी, संजीव, उमेश यादव, धर्मवीर उर्फ धम्मा समेत नौ शातिर अपराधी जेल में कड़ी निगरानी में रह रहे हैं। अब दसवां सुमित चौधरी भी कड़ी निगरानी में रखा गया है।



दो लाख के इनामी अपराधी सुमित चाैधरी को एसटीएफ बरेली की टीम ने गिरफ्तार किया है। उसे जेल भेजने की कार्रवाई की गई है। जेल में उसको कड़ी सुरक्षा के बीच रखा जाएगा। इसके लिए जेल प्रशासन से भी वार्ता की गई है। - डॉ. बृजेश कुमार सिंह, एसएसपी

बदायूं के टॉप टेन अपराधियों में शामिल था सुमित



शातिर बदमाश सुमित चौधरी बदायूं जिले के टॉप टेन अपराधियों के शामिल था। 12 मई वर्ष 2018 को वह जेल से भागा था। बदायूं जेल में बंद रहने के दौरान उसकी मुलाकात गोरखपुर के शूटर देवकीनंदन उर्फ चंदन सिंह से हुई थी भी। दोनों एक ही बैरक में रहने लगे और देखते ही देखते गहरी दोस्ती हो गई।







रस्से के सहारे दीवाल कूदा सुमित, चंदन रह गया अंदर



जानकार बताते है कि 2018 में 12 मई की रात करीब पौने आठ बजे सिविल लाइंस थाना क्षेत्र के पीछे से जेल की दीवार पर रस्सा फेंका गया। रस्सी का दूसरा सिरा कबाड़ में खड़े एक ट्रक से बांधा गया था। तय योजना के मुताबिक सुमित रस्से के सहारे दीवार फांदकर फरार हो गया, जबकि चंदन सिंह ने दो बार कोशिश की लेकिन वह सफल नहीं हो पाया।



बाद में चंदन सिंह भी आगरा मेडिकल कॉलेज से फरार हो गया था, लेकिन सुमित की तलाश शुरू से ही पुलिस और एसटीएफ के लिए बड़ी चुनौती बनी रही। फरारी के बाद सुमित दिल्ली, मेरठ, तमिलनाडु, असम, नेपाल और उड़ीसा जैसे इलाकों में छिपता रहा। कई बार टीमें लगीं लेकिन उसका कोई सुराग नहीं मिला।







जेल में मिली थी पिस्टल, सिपाही पर लगा आरोप



बदायूं जिला जेल में मोबाइल, चरस, गांजा, बीड़ी-सिगरेट तक बंदियों तक आसानी से पहुंच जाती थी चंदन सिंह के गुर्गों ने एक सिपाही से दोस्ती कर ली और उसकी मदद से जेल में पिस्टल तक पहुंचा दी गई।







होमगार्ड पर की थी फायरिंग



भागने की रात गिनती के बाद सुमित और चंदन सिंह दीवार किनारे फसल में छिपकर अपने साथियों के इशारे का इंतजार कर रहे थे। जैसे ही बाहर से टॉर्च का संकेत मिला, रस्सी फेंकी गई और सुमित ऊपर चढ़ गया। उसी वक्त वहां मौजूद होमगार्ड ने उन्हें रोकने की कोशिश की तो चंदन सिंह ने उस पर गोली चला दी। गनीमत रही कि होमगार्ड बाल-बाल बच गया और मौके पर पहुंचे अन्य कर्मचारियों ने चंदन सिंह को पकड़ लिया था।



शुभम शर्मा की पहचान ओढ़कर मोबाइल फोन के बिना आठ साल छिपता रहा सुमित
- साल में एक बार राह चलते शख्स से मोबाइल फोन मांगकर पड़ोसियों को कॉल कर परिवार से करता था बात
अमर उजाला ब्यूरो
बरेली। शातिर अपराधी सुमित चौधरी, शुभम शर्मा नाम की पहचान ओढ़कर आठ साल तक छिपता रहा। इस दौरान उसने मोबाइल फोन का इस्तेमाल नहीं किया। इस वजह से सुरक्षा एजेंसियां उसका सुराग नहीं जुटा सकीं। यह प्रकरण इस बात का भी प्रमाण है कि किस हद तक पुलिस सर्विलांस पर निर्भर हो चुकी है। मुखबिर तंत्र पूरी तरह निष्क्रिय हो गया है।
सुमित के परिवार के कई सदस्य पुलिस विभाग में हैं। इसलिए उसे पुलिस के कामकाज के बारे में काफी जानकारी है। इसलिए वह किसी भी परिजन से मोबाइल के जरिये बात नहीं करता था। सोशल मीडिया पर भी किसी से संपर्क नहीं रखता था। वह साल में एकाध बार किसी राह चलते शख्स से मोबाइल फोन मांगकर पड़ोसियों को कॉल कर परिजनों से बात करता था।
एसटीएफ को कई बार इसकी भनक लगी, पर टीम सिर्फ उस शख्स तक पहुंच सकी, जिसके नंबर से सुमित ने बता की थी। थक हारकर एसटीएफ ने मुखबिरों का सहारा लिया तो सुमित को पकड़ने में कामयाबी मिली।
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