मानव शरीर पानी के बुलबुले के समान है। इसका कब अंत हो जाए कोई पता नहीं है। मानव को अपने शरीर के प्रति नहीं ईश्वर के प्रति आस्थावान होने की जरूरत है। यह बात कही बिरऊआबाड़ी के गीता भवन में श्रीमद्भागवत कथा का प्रवचन कर रहे कथावाचक संत दीन दयालु पांडेय महाराज ने।
सुविख्यात कथा वाचक ने बताया के करोड़ों वर्ष की योनियों में भ्रमण कर मानव का शरीर प्राप्त होता है। शरीर तो समाप्त हो जाता है लेकिन आत्मा बनी रहती है। आत्मा अजर, अमर है। जीवन का अंतिम लक्ष्य ईश्वर प्राप्ति है, जो बिना संतों के दर्शन और कृपा बिना उपलब्ध नहीं होती। दृष्टांत में उन्होंने कहा कि जिस प्रकार खेत किसानों से लिया अन्न उससे कई गुनाकर वापस कर देता है, उसी प्रकार ईश्वर भी दान किया धन और वस्तु उसकी कई गुना बढ़ाकर दानी को प्रदान कर देता है। सांस पर विश्वास नहीं ईश्वर पर विश्वास करो जिसकी वजह से सांस मिल रही है। उन्होंने बताया कि भागवत गोपनीय है। रहस्यात्मक है। जहां इसकी कथा होती है, वह स्थान तीर्थ बन जाता है। देर रात तक कथा में ध्वनि यंत्रों पर भक्त नृत्य कर झूमते रहे। क था में महाराज मुमुक्ष कृष्ण शास्त्री, मुख्य यजमान अर्जुन लाल गुप्ता, कामेश पाठक, सतीश चंद्र शर्मा, हरभगवान अरोड़ा, श्याम वैश्य, ओम प्रकाश शास्त्री समेत बड़ी तादाद में भक्त मौजूद रहे।