बदायूं। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत अधिकतर इलाकों में ऐसे अपात्रों को आवास दे दिए गए जिनके पास पक्के मकान हैं। गाड़ियों समेत सुख-सुविधा के तमाम संसाधन हैं, जबकि बेघर आज भी सिर पर छत की आस लगाए सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगा रहे हैं। प्राथमिक जांच में सांठगांठ के चलते यह खेल दबा दिया गया लेकिन दोबारा जांच हुई तो पोल खुलनी शुरू हो गई है। अब तक 40 हजार लाभार्थियों के सत्यापन में 25 हजार के अपात्र होने की पुष्टि हो चुकी है।
प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत जिलेभर से करीब 72 हजार आवेदन आए हैं। जब से यह प्रक्रिया शुरू हुई है, तब से शिकायतों का दौर भी शुरू हो गया है। तमाम लोग ऐसे हैं, जो ब्लॉक स्तर से लेकर जिला मुख्यालय तक आवासों के लिए भटक रहे हैं लेकिन उन पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा।
ग्राम पंचायत स्तर से जो सूची भेजी गई, उन्हें ही पात्र मान लिया गया। जिन लोगों ने प्रधानमंत्री आवासों के लिए आवेदन किया था, उनकी जांच भी कराई गई थी लेकिन ग्राम पंचायत सचिवों ने मनमानी करते हुए तमाम अपात्रों को ही पात्र बना दिया। जांच के नाम पर केवल खानापूर्ति की गई और सूची फाइनल करके उच्चाधिकारियों को भेज दी गई।
अब इसकी दोबारा जांच शुरू हो गई है। जो 72 हजार आवेदन आए थे, उनमें 40 हजार का सत्यापन हो चुका है। इनमें 25 हजार आवेदक अपात्र निकले हैं। केवल 15 हजार आवेदक ही पात्र पाए गए हैं। अभी 32 हजार आवेदनों की जांच नहीं हो पाई है।
अनुमान लगाया जा रहा है कि अगर इनकी जांच कराई गई तो इनमें भी आधे से ज्यादा अपात्र निकलेंगे। इस जांच ने ग्राम पंचायत सचिवों की कार्यशैली पर सवाल उठा दिया है। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन आखिर किसके खिलाफ कार्रवाई करेगा।
पांच साल पहले बनाई गई थी सूची, अब मिलेगा आवास
- प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक, इस समय उन्हीं लोगों को ही योजना के तहत आवास दिया जा रहा है, जिन्होंने पांच साल पहले आवेदन किया था या प्रधान ने लोगों को आवास के लिए नामित किया था। उसी सूची के आधार पर आवास दिया जा रहा है।
आज भी कच्चे मकान में रह रहीं श्यामकली
- आस़पुर ब्लॉक क्षेत्र के गांव बीधा नगला की श्यामकली वर्षों से कच्चे मकान में रहती आ रही है। उनके पति की कई साल पहले मौत हो चुकी है। उनके पास न तो राशन कार्ड है और न गैस का कनेक्शन। पिछले साल एसडीएम ज्योति शर्मा ने उन्हें आवास दिलाने का आश्वासन दिया था। आवेदन किया तो उनसे 15 हजार रुपये मांगे गए। न दे सकीं तो आवास नहीं मिला।
- वर्ष 2018 में ग्राम पंचायत स्तर से प्रधानमंत्री आवासों की सूची बनाई गई थी। उसके आधार पर ही यह आवास दिए जा रहे हैं। इसमें कोई नया आवेदक शामिल नहीं है। जो आवेदन आए थे। उसकी जांच कराई जा रही है। उसके हिसाब से आवास दिया जाएगा। - अनिल कुमार, पीडी
(29 बीडीएन-12)बीधा नगला में बना श्यामकली का कच्चा मकान।संवाद