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...ये दिल तूने होठों से चोट खाई है!

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संस्कार भारती ओर से ओर शनिवार शाम आयोजित काव्य गोष्ठी में कवि अलग-अलग रस से सराबोर होकर पंक्तियां सुनाते दिखे। किसी ने व्यवस्था पर कटाक्ष किया तो कोई मानवता पर हो रहे प्रहार पर शब्दों में पिरोते रहा।
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काव्य गोष्ठी जीएस कॉलेज ऑफ फार्मेसी एंड पैरा मेडिकल साइंस परिसर में परिसर में सरस्वती के पूजन के साथ हुई। शुरुआत में शायर वारिस उझानवी ने सुनाया-अच्छे किरदार से बढ़कर कोई हथियार नहीं होता, बरछिया तीर न तलवार भाले रखना ना। रामकुमार निर्गुण बोले- राष्ट्रधर्म से बढ़कर कोई धर्म नहीं होता, भारत मां की सेवा से बढ़कर कोई कर्म नहीं होता।
शायर जाकिर भाई ने कहा- हमने देखे नहीं बरते हुए पत्थर, ऐ दिल तूने होंठों से चोट खाई है। गोष्ठी में संस्था के अध्यक्ष गीतम सिंह, विजय वार्ष्णेय, शैलेंद्र नाथ घायल, सुभाषचंद्र सक्सेना, आबिद हुसैन आदि ने भी काव्य पाठ किया। कवियों ने कश्मीर के मुद्दे पर आतंकियों के मंसूबों पर भी करारे प्रहार किए। देर शाम तक चली गोष्ठी में सैंकड़ों की संख्या में काव्य प्रेमी मौजूद रहे।
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