बदायूं। जिले में अवैध अस्पतालों की बाढ़ सी आ गई है। इन अस्पतालों पर स्वास्थ्य विभाग भी मेहरबान है। इसकी वजह से हर माह पांच से छह गर्भवतियों व प्रसूताओं की जान चली जा रही है। इन अस्पतालों में प्रसव करने वाले डॉक्टर नहीं झाेलाछाप होते हैं। मौत के बाद अस्पताल सील करने का नाटक और नोटिस देने का खेल किया जा रहा है। अवैध अस्पतालों के संचालकों ने दबी जुबान में स्वीकार किया कि अधिकारी संरक्षण देने के बदले उनसे हर महीने कीमत भी वसूलते हैं।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, जिले में सरकारी समेत 283 अस्पताल पंजीकृत हैं, जबकि संचालित छह सौ से अधिक हैं। यह हम नहीं स्वास्थ्य विभाग की सर्वे रिपोर्ट बता रही है। सर्वे रिपोर्ट से साफ है कि जिले में 300 से अधिक अस्पताल अवैध रूप से संचालित हैं। इन अस्पतालों के पंजीकरण से लेकर संचालन तक की पूरी जिम्मेदारी एसीएमओ स्तर के अधिकारी व संबंधित पटल के बाबुओं ने ले रखी है। इन अस्पतालों में न तो महिला डॉक्टर होते हैं और न ही डिग्री धारक स्टाफ व डॉक्टर।
इसके बाद भी एक-एक अवैध अस्पताल में हर रोज 05 से 06 प्रसव झोलाछापों के हाथों से कराए जा रहे हैं। एक प्रसव के 20 हजार से लेकर 35 हजार रुपये तक संचालक वसूल रहे हैं। संचालकों के मुताबिक, इसमें से 20 फीसदी कमाई स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों तक हर माह पहुंच रही है। यही वजह है कि महीने में पांच से छह महिलाएं इन झोलाछापों के हाथ से अपनी जान गवां रहीं हैं।
जिला प्रशासन ने मूंद रखीं हैं आंखें
जिला प्रशासन ने पिछले एक साल में झोलाछापों पर न तो कोई कार्रवाई की और न हीं कोई आदेश इनको बंद कराने का दिया। यही वजह है कि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी व कर्मचारी निरंकुश हो खुलेआम लूट मचा रहे हैं। वह भी लोगों की जान लेकर। इस ओर कठोर कार्रवाई अमल में लाई जाए तब कहीं इस मकड़जाल से जिले के लोगों को निजात मिल सकेगी।
इन प्रसूताओं और गर्भवतियों की हुई है मौत
22 नवंबर : बिसौली में 22 नवंबर शुक्रवार देर रात क्षेत्र के गांव सिद्धपुर निवासी एहवरन सिंह की पत्नी पिंकी (25) का झाेलाछाप के हाथ से प्रसव करा दिया गया। इसमें उनकी मौत हो गई। इस मामले में परिजनों के हंगामे को देख अधिकारियों ने अस्पताल को सील कर दिया, बावजूद इसके विभाग की ओर से आरोपियों के खिलाफ एफआईआर अब तक दर्ज नहीं कराई जा सकी है। यह अस्पताल दबतोरी बाइपास के पास मेडिकेयर हॉस्पिटल के नाम से संचालित हो रहा था।
22 अगस्त : शहर के खेड़ा नवादा स्थित एक अवैध अस्पताल में 22 अगस्त को हजरतपुर थाना क्षेत्र के गांव बलदेव नगला निवासी श्रवण कुमार की पत्नी जयवंती की मौत हो गई थी। इस अस्पताल पर भी अब तक कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है। हालांकि विभाग के अधिकारियों ने अस्पताल को सील करने का नाटक किया था, जो दो माह बाद पुन: संचालित होने लगा।
12 जून : सहसवान के एक अवैध अस्पताल में 12 जून को क्षेत्र के गांव धोबई के निवासी उमेश की पत्नी नन्हीं की प्रसव के दौरान मौत हो गई थी। अस्पताल को सील किया गया था। एक सप्ताह बाद ही अस्पताल शुरू हो गया।
29 जून : दातागंज में संचालित एक अवैध अस्पताल में 29 जून को क्षेत्र के गांव भटौली निवासी रवेंद्र कुमार की पत्नी चांदनी की प्रसव के दौरान मौत हो गई। विभाग ने इस अस्पताल पर कोई कार्रवाई नहीं की है। आज भी अस्पताल बिना रोकटोक चल रहा है। यहां पहले भी प्रसूताओं की मौत हो चुकी है।
जिन अस्पतालों में प्रसूताओं की मौत सामने आती है, उन पर तुरंत कार्रवाई कराई जाती है। अगर वह अस्पताल फिर से संचालित हो रहे हैं या फिर किसी संलिप्तता में हैं तो मामले की जांच कराके कार्रवाई कराई जाएगी। इस तरह से खिलवाड़ नहीं होने दिया जाएगा। -रामेश्वर मिश्रा, सीएमओ बदायूं
बिसौली में सीज मेडिकेयर हॉस्पिटल। संवाद
बिसौली में सीज मेडिकेयर हॉस्पिटल। संवाद