इस बार भी नहीं बढ़ी क्षमता, फिर घाटे में जाएगी शेखूपुर मिल
पिछले पेराई सत्र में हुआ था 2.50 करोड़ का घाटा
करीब 38 साल पहले स्थापित शेखूपुर चीनी मिल की प्रति क्विंटल गन्ना पेराई रिकवरी सिर्फ 7.10 प्रतिशत है। जबकि बिसौली स्थित निजी क्षेत्र की यदु शुगर मिल की रिकवरी 9.30 और रजपुरा स्थित धामपुर शुगर मिल की पेराई रिकवरी 9.50 प्रतिशत है। ऐसे में निजी क्षेत्र की चीनी मिलों के मुकाबले सहकारी क्षेत्र की चीनी मिल लगातार पिछड़ रही है। काबिलेगौर यह भी है कि शेखूपुर चीनी मिल की पेराई क्षमता भी काफी कम है। यहां चौबीस घंटे में 12500 क्विंटल गन्ना की पेराई हो सकती है। जबकि यदु शुगर मिल की 24 घंटे में पेराई क्षमता 65000 और डीएसएम मिल की 85000 क्विंटल है। ऐसे में शेखूपुर चीनी मिल लगातार पिछड़ रही है।
पिछले पेराई सत्र में शेखूपुर मिल को करीब 2.50 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था। इसके बाद मिल की पेराई क्षमता बढ़ाने के साथ आधुनिकीकरण की मशक्कत शुरू हुई। लखनऊ और दिल्ली से आए इंजीनियर्स की टीम ने मिल का निरीक्षण भी किया। इसके बाद आधुनिकीकरण के लिए ब्लू प्रिंट तैयार कर शासन को भेज दिया गया, लेकिन यह प्रस्ताव शासन स्तर पर लटक गया है।
मिल चालू होने में अभी लगेगा वक्त
बदायूं। पुराने जमाने की मशीनों की मरम्मत में देरी की वजह से अब तक शेखूपुर चीनी मिल में पेराई चालू नहीं हो सकी है। हालांकि पेराई सत्र का शुभारंभ बुधवार को ही हो गया था। अब तक मशीनों की मरम्मत का काम पूरा न होने से गन्ना पेराई शुरू नहीं हो सकी है। हालांकि गन्ना क्रय केंद्र आवंटन में शेखूपुर चीनी मिल को 11 क्रय केंद्र आवंटित हुए हैं।
पेराई में देरी से इंडेंट पर लटका
बदायूं। पेराई चालू होने में देरी से गन्ना इंडेंट भी लटक गया है। मरम्मत का काम पूरा होने से पहले गन्ना सहकारी संघ ने किसानों को पर्चियां जारी करने से भी हाथ खींच लिए हैं। हालांकि कहा जा रहा है कि अगले दो दिन में इंडेंट जारी करने शुरू कर दिए जाएंगे।
जिला सहकारी गन्ना संघ के सचिव रामकिशन ने बताया मिल के आधुनिकीकरण और विस्तारीकरण का प्रस्ताव शासन स्तर पर लंबित है। मिल
की पेराई क्षमता बढने और आधुनिकीकरण होने से रिकवरी में भी इजाफा होगा।
इससे मिल का घाटा कम होगा। चालू सत्र में गन्ना पेराई 21 दिसंबर से शुरू हो
जाएगी।