फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पूरी तरह से दिग्गजों की चल नहीं पाई

Tue, 03 Nov 2015 12:49 AM IST
बदायूं
विज्ञापन
विज्ञापन

विज्ञापन
जिले में कई छोटे-बड़े नेता और दबंग किस्म के लोगों ने अपने परिवार के सदस्यों को चुनाव मैदान में उतारा, जिनमें अधिकतर को हार का मुंह देखना पड़ा।
पूर्व  राज्य मंत्री भाजपा नेता भगवान सिंह शाक्य के भाई रवींद्र शाक्य, पुत्र  सनी शाक्य, पुत्री अनीता शाक्य और पुत्रबधू अन्नू शाक्य ने जिला पंचायत में  भाग्य आजमाया लेकिन चारों ही हार गए। सपा विधायक आशुतोष मौर्य की बहन मधु  चंद्रा और भतीजी नेहा सिंह चुनाव में उतरीं, इनमें नेहा सिंह हार गईं। वजीरगंज ब्लाक में कस्बा के चेयरमैन के भाई आले अहमद चुनाव हार गए। पूर्व ब्लाक प्रमुख लाखन सिंह चुनाव हार गए। निवर्तमान ब्लाक प्रमुख प्यारे रतन सिंह की पत्नी कंजुआ से विजयी रहीं। इनकी दो पुत्रवधू चुनाव हार गईं। पूर्व ब्लाक प्रमुख धीरेंद्र यादव कुर्वी क्षेत्र पंचायत का चुनाव जीते तो उनकी पत्नी पूर्व जिला पंचायत सदस्य/ पूर्व ब्लाक प्रमुख आभा यादव जिला पंचायत का चुनाव हार गईं। विजेंद्र यादव भी जिला पंचायत का चुनाव हार गए।
बाक्स
भतीजी ने ताई को, चचेरे ने तहेरे भाई को दी मात  
दातागंज। निवर्तमान ब्लाक प्रमुख माहेश्वरी यादव और उनके पति सतीश यादव भी क्षेत्र पंचायत सदस्य के लिए अपने परिवार के सदस्यों से हार गए।
निवर्तमान ब्लाक प्रमुख माहेश्वरी यादव आजमपुर से खड़ी हुईं थीं। विरोध में उनके सामने भतीजी भूदेवी पुत्र कालीचरन थीं जिनसे माहेश्वरी यादव हार गईं। इसी तरह उनके पति सतीश यादव कलाकंद से क्षेत्र पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ रहे थे।  उन्हें उनके चचेरे भाई कालीचरन ने हराया। इस बात की क्षेत्र में व्यापक  चर्चा है।
विज्ञापन

---------------------------------------
हत्यारोपी ब्लाक प्रमुख हारा, पत्नी और बेटा जीते
एक परिवार के पांच लोग थे चुनाव मैदान में
मां और एक बेटे को भी देखना पड़ा हार का मुंह
इस्लामनगर। हत्यारोपी निवर्तमान ब्लाक प्रमुख सुरेश यादव सोहरा सीट से बीडीसी का चुनाव हार गया है। उसका एक बेटे वीरेश यादव को भी लश्करपुर ओहिया जिला पंचायत सदस्य सीट से हार का मुंह देखना पड़ा है। हालांकि सुरेश यादव का एक बेटा दिनेश यादव गुरीठा सीट से और इसकी पत्नी कैलाशो देवी मोजुद्दीनगर से बीडीसी का चुनाव जीत गए हैं। सुरेश यादव के परिवार के पांच लोग मैदान में थे।
इस्लामनगर का निवर्तमान ब्लाक प्रमुख सुरेश यादव सेाहरा सीट से बीडीसी का प्रत्याशी था। अपने प्रतिद्वंदी प्रेमजीत पर उसने नाम वापसी का दवाब बनाया था। इसी को लेकर दोनों पक्षों में विवाद हो गया था। इस दौरान प्रेमजीत पक्ष के मदनलाल की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। मामले में सुरेश यादव समेत 17 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया था। 13 लोग जेल जा चुके हैं। सुरेश यादव, उसका बेटा दिनेश यादव, भाई उमेश यादव और भतीजा मुकेश यादव फरार हैं।
सत्ता के करीबी सुरेश यादव को चुनाव परिणाम आने के बाद बड़ा झटका लगा है। सुरेश यादव को हराकर सोहरा बीडीसी सीट पर प्रेमजीत ने परचम लहराया है। चिचैटा सीट से सुरेश यादव की मां शांति देवी को हार का मुंह देखना पड़ा है। लश्करपुर ओहिया सीट से उसका बेटा वीरेश यादव चुनाव हारा है। हालांकि गुरीठा सीट से उसका बेटा दिनेश यादव और मोजुद्दीनगर बीडीसी सीट से पत्नी कैलाशो देवी चुनाव जीत गई हैं।

पूर्व प्रमुख गुरु समेत रत्नेश के सिर पर बंधा जीत का सेहरा
 
 उझानी (बदायूं)। क्षेत्र पंचायत सदस्य के चुनावी नतीजों ने पूर्व ब्लॉक प्रमुख कृष्णपाल यादव के परिवार के राजनीतिक कद को बढ़ा दिया है। उनकी पत्नी पूर्व प्रमुख रत्नेश यादव समेत सभी पांच बीडीसी चुन लिए गए। जीत की इसी श्रंखला में विकास यादव का नाम भी जुड़ गया। जिला पंचायत सदस्य निर्वाचित विकास पूर्व प्रमुख गुरु के बेटे हैं।
कृष्णपाल यादव गुरू ने अपनी परंपरागत सीट बुर्रा फरीदपुर से जीत हासिल की है। वह दो बार ब्लॉक प्रमुख भी रह चुके हैं। उनकी पत्नी पूर्व ब्लॉक रत्नेश यादव ने क्षेत्र पंचायत की भैंसोरा सीट से विजय प्राप्त की। फतेहपुर से पुत्रवधू विनीता यादव, मलिकपुर से भाभी लज्जावती और भतीजे शंभू यादव ने फलासी क्षेत्र पंचायत सीट से जीत हासिल कर कुनबे के राजनीतिक कद बढ़ाया है। पूर्व प्रमुख समेत परिवार के पांच सदस्यों की जीत ने ब्लॉक प्रमुख के चुनाव में उनका आधार भी मजबूत कर दिया है। सूत्रों की मानें तो पार्टी के वरिष्ठ नेता इस जीत से अच्छी तरह वाकिफ हैं। काफी हद तक संभव है कि इसका पूर्व प्रमुख परिवार को फायदा भी मिले। बता दें कि ब्लाक प्रमुख पद के दावेदारों में हरवंश पहलवान पहले ही निर्विरोध चुने जा चुके हैं।
विज्ञापन

इंसेट
प्रमुख छोटी वर्मा के पति हारे
उझानी। ब्लॉक प्रमुख छोटी वर्मा ने इस बार क्षेत्र पंचायत में किस्मत नहीं आजमाई। उनके पति हीरालाल वर्मा ने जिला पंचायत की सकरीजंगल सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन उन्हें करारी हार का सामना करना पड़ा।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें