लगातार कम हो रही जिले के खेतों की उर्वरक क्षमता
कृषि विभाग ने मृदा के 25,932 नमूने लेकर किया परीक्षण
किसान खेतों से अधिक उपज लेने के चक्कर में जमकर रसायनिक खादों और पेस्टीसाइड का प्रयोग कर रहे हैं। इससे खेतों में उर्वरक तत्व लगातार कम हो रहे हैं। कृषि विभाग की ओर से जिले भर से खेतों की मिट्टी के 45523 नमूने लिए जाने का लक्ष्य रखा गया था, जिसमें से अब तक 25932 नमूने लिए जा चुके हैं। इसमें तमाम नमूनों का परीक्षण किया जा चुका है, जिसमें जिले के खेतों की मिट्टी बीमार होने की पुष्टि हो गई है।
जमीन की उर्वरक क्षमता बढ़ाने वाले मुख्य तत्व नाइट्रोजन, फॉसफोरस और पोटाश हैं, जबकि सूक्ष्म तत्व के रूप में कैल्शियम, मैग्नीशियम, सल्फर, जिंक, बोरान, आयरन आदि सूक्ष्म तत्व पाए जाते हैं। मिट्टी में इन सब तत्वों की मात्रा निर्धारित मात्रा से घटती जा रही है। साथ ही जीवांश (आर्गेनिक कार्बन) भी घट गए हैं। आर्गेनिक कार्बन की मात्रा 0.8 प्रतिशत होनी चाहिए, जो घटकर 0.4 से भी कम रह गई है। मृदा नमूनों के परीक्षण में यह बात सामने आई है। आर्गेनिक कार्बन घटने से धरती की पानी रोकने की क्षमता कम हो गई है। इन सबकी कमी की वजह से खेतों की मिट्टी बीमार होती जा रही है, जिसका समय से इलाज नहीं किया गया तो आगे परिणाम बहुत घातक हाेंगे।
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वर्जन
जिले के किसानों के खेतों से मृदा के करीब 26 हजार नमूने लिए जा चुके हैं। इसमें जिस मृदा का परीक्षण किया गया है, उनमें खेतों में पाए जाने वाले उर्वरक तत्व कम पाए गए हैं। किसानों को जैविक खादों का प्रयोग करना होगा। साथ ही रसायनिक खादों के प्रयोग कम से कम करना होगा।
आरपी चौधरी, उप कृषि निदेशक