सांसद धर्मेंद्र यादव समेत 45 नेताओं ने अखिलेश के पक्ष में सौंपा हलफनामा
इनमें कई विधायक, पूर्व विधायक, मंत्री और पदाधिकारी भी शामिल
समाजवादी पार्टी में मचे घमासान के बीच मुलायम सिंह यादव का चहेता रहा बदायूं अखिलेशवादी हो गया है। जिले के तमाम सपा नेताओं ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पर भरोसा जताया है। मुलायम परिवार के सांसद धर्मेंद्र यादव के साथ उनके करीबी रहे सपा जिलाध्यक्ष बनवारी सिंह यादव और ग्राम्य विकास राज्यमंत्री ओमकार सिंह भी इनमें शामिल हैं। कुल मिलाकर 45 नेताओं ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के समर्थन में हलफनामा दिया है। इनमें ज्यादातर जिले के कद्दावर नेता हैं तो कुछ हल्के-फुल्के कद के भी हैं। हालांकि अखिलेश के समर्थन में हलफनामा देने के बावजूद इन नेताओं का एक सुर से यह कहना भी है कि पार्टी के सर्वोपरि नेता मुलायम सिंह ही रहेंगे।
सपा में वर्चस्व को लेकर शुरू हुए घमासान के बाद जिले के सपाइयों में काफी समय से ऊहापोह की स्थिति है। पिछले दिनों रामगोपाल यादव ने सपा का राष्ट्रीय सम्मेलन बुलाया था जिसमें मुलायम सिंह यादव को अपदस्थ कर अखिलेश यादव को पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना जा चुका है। इससे पहले सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव ने अखिलेश यादव और रामगोपाल यादव को पार्टी से बर्खास्त कर दिया था। मुलायम और अखिलेश दोनों गुटों ने समाजवादी पार्टी और उसके चुनाव चिह्न पर भी दावा ठोक दिया। इसी उठापटक के बीच मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपना पक्ष मजबूती से चुनाव आयोग के सामने रखने के लिए पूरे प्रदेश के पार्टी के सभी विधायकों और बड़े नेताओं से हलफनामा मांगा। अखिलेश के हलफनामा मांगने के बाद सपा के जो बड़े नेता तो मुलायम सिंह के साथ खड़े थे, वे अखिलेश यादव के साथ आ गए। सांसद धर्मेंद्र यादव समेत जिले के सभी सपा विधायकों और बड़े नेताओं ने अखिलेश यादव के पक्ष में हलफनामा दिया है।
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- इन नेताओं ने दिया हलफनामा
सांसद धर्मेंद्र यादव, सपा जिलाध्यक्ष/एमएलसी बनवारी सिंह यादव, ग्राम्य विकास राज्यमंत्री ओमकार सिंह, विधायक आशीष यादव, विधायक आशुतोष मौर्य, डीसीबी चेयरमैन ब्रजेश यादव, मौलाना डॉ. यासीन उस्मानी, जिला महासचिव सुरेश चौहान, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष चेतना सिंह, पूर्व राज्यमंत्री विमल कृष्ण अग्रवाल, पूर्व विधायक प्रेमपाल यादव, सर्वेश यादव, बलवीर सिंह, हिमांशु यादव, खालिद परवेज, मोतशाम सिद्दीकी, टेड़ामल अग्रवाल, राजपाल शर्मा, रामवीर यादव इसके अतिरिक्त बदायूं के कुछ नेताओं ने लखनऊ में हलफनामा लिखे हैं।
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मुलायम का बदायूं से रहा है खास लगाव
बदायूं। सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव को बदायूं से बेहद लगाव लगा है। बदायूं को मुलायम सिंह की कर्मभूमि भी कहा जाता है। मुलायम सिंह यादव 1996 में सहसवान विधानसभा से चुनाव लड़े थे। इस चुनाव में उनकी रिकार्ड मतों से जीत हुई। इसके बाद 2004 में सूबे का मुख्यमंत्री रहते हुए मुलायम सिंह ने बदायूं की गुन्नौर विधान सभा से चुनाव लड़ा। मुलायम के चुनाव लड़ने के लिए अजीत यादव ने यह सीट छोड़ी थी। यहां भी मुलायम सिंह ने रिकार्ड मतों से जीत दर्ज की थी। संभल लोकसभा सीट से मुलायम सिंह के भाई रामगोपाल यादव सांसद रह चुके हैं। उस वक्त बदायूं की गुन्नौर और बिसौली विधानसभा सीट संभल लोकसभा सीट में जुड़ी हुई थीं। वर्तमान में भी मुलायम सिंह के भतीजे धर्मेंद्र यादव बदायूं से सांसद हैं।
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मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के समर्थन में जिले के करीब 45 नेताओं ने हलफनामा दिए हैं। इनमें सांसद धर्मेंद्र यादव, सपा जिलाध्यक्ष बनवारी सिंह और सपा के विधायकों समेत पदाधिकारी शामिल हैं। -सुरेशपाल चौहान, सपा जिला महासचिव