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चर्चित बाबू बोला- मेरा क्या कसूर, भाई के नाम ही तो ट्रांसफर हुई बाइक

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बदायूं। एआरटीओ दफ्तर में पौने दो साल पहले मरे युवक को उसे जीवित दिखाकर बाइक उसके भाई के नाम ट्रांसफर कर दी गई। अमर उजाला ने मामले का भंडाफोड़ किया तो दूसरे दिन भी अफसरों ने चहेते चर्चित बाबुओं पर कार्रवाई नहीं की। एक बाबू ने क्रेता पक्ष को कार्रवाई का डर दिखाकर मामला मैनेज करने की कोशिश की है। बाबू ने मीडिया को सफाई दी कि मृतक की बाइक किसी और के नहीं उसके भाई ने ही खरीदी तो इसमें उसका क्या दोष है। हालांकि अब डीएम मामले में कार्रवाई कराने की बात कह रही हैं।
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करीब दो साल पहले आत्महत्या कर चुके युवक की बाइक को मार्च महीने में उसके भाई के नाम ट्रांसफर दिखाने का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। इस मामले में मृतक को बाकायदा एआरटीओ दफ्तर में हाजिर दिखाकर उसका फोटो प्रमाणित करने का काम किया गया। बताते हैं कि इस मामले में दफ्तर के दो बाबुओं की भूमिका रही, हालांकि इनमें से एक बाबू ज्यादा चर्चित है और भंडाफोड़ के बाद वह मामले को दबाने में लगा है। उसका प्रयास है कि किसी एजेंट या क्रेता को फंसाकर अपनी गर्दन बचा ले। बृहस्पतिवार को वह पूरे दिन जोड़तोड़ में लगा। दफ्तर पहुंचे पोर्टल व चैनल के पत्रकारों को उसने बताया कि किसी दूसरे को बाइक ट्रांसफर की जाती तो ज्यादा बड़ा गुनाह होता। इसमें कुछ खास गलती नहीं है और जिसने बाइक नाम कराई है वो ही ज्यादा दोषी है। एआरटीओ का नंबर भी ज्यादातर वक्त ऑफ रहा। हालांकि दफ्तर में बाबू के कारनामे को लेकर खासी चर्चा रही।
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- मृतक को जीवित दिखाकर बाइक ट्रांसफर करने के मामले में जांच कराएंगे, जो भी दोषी होंगे उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। - दीपा रंजन, डीएम
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