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Budaun News: मेले की रौनक क्षेत्रीय मेलार्थियों से बरकरार, आखिर में हो रही बंपर खरीदारी

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मेला देखने ट्रैक्टर में जाता आसपास के गांव का एक परिवार। संवाद - फोटो : reasi news
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कादरचौक। बदायूं जिला पंचायत के द्वारा आयोजित किया जाने वाला मेला ककोड़ा अब स्थानीय और आसपास के लोगों से अपना अस्तित्व बचाए हुए है। क्षेत्रीय लोग शादी ब्याह से लेकर घर की जरूरतों का सामान खरीदने मेला परिसर में पहुंच रहे हैं। इसलिए मेला में रौनक बरकरार है।
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खास बात यह है कि मेला अब केवल तीन दिन का शेष है। इंतजामकर्ता जिला पंचायत के अधिकारी और कर्मचारी भी मेला के आखिर में थकान मान गए हैं और मेला को पूरा समय नहीं दे पा रहे हैं। शनिवार को दिन में मेला में जिम्मेदार अधिकारी नदारद रहे। वहीं रविवार को भी पूरे दिन इंतजामकर्ता मेला नहीं पहुंचे। दोनों दिन मेला बिना इंतजामकर्ताओं के चलता रहा।

खूब बिक रहे बक्से, अलमारी, चादर और कालीन
मेला के आखिर में आसपास गांवों के लोग बैलगाड़ी, डनलप और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से पहुंच रहे हैं। शादी ब्याह का सीजन चल रहा है तो बक्सा, अलमारी, चादर, कालीन आदि की खूब बिक्री हो रही है। महिलाएं साड़ी, चूड़िया, कंगन, शीशा कंघी आदि शृंगार का सामान और ढोलक, मंजीरा आदि खरीदने में जुटी हैं।
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किसान अपने पालतू जानवरों बैल, भैंस, गाय आदि के गले और सींगों के शृंगार का सामान खरीद रहे हैं या पैना, लाठी, नादें आदि ले रहे हैं। आसपास गांवों के किसान अपने परिवारों के साथ मेला देखने पहुंच रहे हैं तो उनके साथ बच्चे अपने लिए खिलौने खरीद रहे हैं। इन लोगों की वजह से ही मेला अभी आबाद बना हुआ है।



उजड़ चुकी हैं कल्पवासियों की तंबू की बस्तियां
अधिकांश कल्पवासी अपने-अपने घरों को लौट चुके हैं। पीलीभीत, बरेली और बदायूं के कल्पवासियों की तंबुओं की बस्तियां उजड़ चुकी हैं।ककोड़ा मेला गंगा तट पर लगता है, इसलिए मेला में पहुंचने वाले गंगा स्नान कर पूजा-पाठ कर प्रसाद वितरण जैसे कार्य कर रहे हैं। इसमें ग्रामीण परिवेश के रहने वाले लोगों की संख्या अधिक है। बाहरी लोग दूज तक मेला में रहे, उसके बाद धीरे-धीरे मेला छोड़ने लगे। अब बाहरी के नाम पर केवल मेला में दुकानदार ही बचे हैं। छोटे दुकानदार और ठेला खोमचे वाले आधे से अधिक दुकानदार मेला से जा चुके हैं। आसपास के लोग मेला में सुबह को आते हैं और रात होने से पहले ही वापस हो जाते हैं। चरख और झूले वालों की वजह से भी मेला में कुछ रौनक दिखाई दे रही है।



तीन दिन बाद मेला होगा कासगंज पुलिस के हवाले
ककोड़ा मेला की 12 नवंबर तक की ही परमीशन है। मेला कोतवाली और सुरक्षा की व्यवस्था 12 नवंबर तक बदायूं पुलिस के हवाले रहेगी। तीन दिन बाद बदायूं पुलिस मेला परिसर छोड़ देगी। इसके बाद अगर मेले में दुकानदार और जो लोग रह जाएंगे उनकी सुरक्षा का जिम्मा कासगंज जनपद की पुलिस संभालेगी।



सफाई की चुनौती स्वीकारी, 700 सफाई कर्मी बुलाए
मेला परिसर में मेलार्थियों द्वारा छोड़ी गई गंदगी को साफ करना बड़ी चुनौती थी। अमर उजाला ने इस चुनौती से आगाह किया था। पंचायत राज विभाग ने इस चुनौती को स्वीकारा है। मेला में सफाई के नोडल अधिकारी एडीओ पंचायत ब्रह्मनरायण शर्मा ने बताया कि जिले के ग्रामीण क्षेत्र से 700 कर्मचारियों को मेला की गंदगी समेटने के लिए बुलाया गया है। इससे पूर्व मेला में प्रतिदिन करीब 250 सफाई कर्मचारी ही काम पर लगाए गए थे। सफाई कर्मचारियों की बड़ी हुई संख्या गंदगी का निस्तारण करेगी।



दो मिनी ट्रक भरकर उठवाया गया कबाड़
मेला के आखिरी चरण में मेला स्थल पर पानी की बोतले, प्लास्टिक और टिन का सामान बाहर से आए कबाड़ियों ने मेला के कूड़े से उठवा लिया। दो मिनी ट्रक भरकर कबाड़ वे अपने साथ ले गए। मेला स्थल पर अब भी कबाड़ियों की नजरें हैं। कबाड़ियों ने कबाड़ बिनवाने के लिए अपने कई लड़के लगा रखे हैं, जो कबाड़ से मुनाफे के चक्कर में कूड़ा टटोलने में लगे हुए हैं।

मेला देखने ट्रैक्टर में जाता आसपास के गांव का एक परिवार। संवाद- फोटो : reasi news

मेला देखने ट्रैक्टर में जाता आसपास के गांव का एक परिवार। संवाद- फोटो : reasi news

मेला देखने ट्रैक्टर में जाता आसपास के गांव का एक परिवार। संवाद- फोटो : reasi news

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