उझानी में नाले का पानी खेतों में भर जाने से गेहूं की पूलियां समेटते महिला- पुरुष। संवाद
उझानी। नरऊ तालाब से पहले मुख्य नाला का निकास बंद हो जाने से आसपास इलाके के किसानों की दिक्कत बढ़ती जा रही है। बारिश के बाद नाले में प्रवाह बढ़ा तो पानी उन खेतों में भी भर गया, जहां दो- तीन दिन पहले से गेहूं कटे पड़े हैं। खेत मालिकों को गेहूं की पूलियां समेटकर ले जाना भी मुश्किल हो गया।
कस्बे से सटे इलाके में नाले के पानी से सबसे ज्यादा दिक्कत गंजशहीदा मोहल्ला के रामलीला नगला, गांव मलिकपुर और नरऊ निवासी ग्रामीणों को आई है। रामलीला नगला मोहल्ले की निवासी सिद्धवती ने बताया कि उन्होंने तीन दिन पहले गेहूं की कटाई कराई थी। अगले दिन बूंदाबांदी हुई तो नमी की वजह से गेहूं की पूलियों को सूखने के लिए खेत में छोड़ दिया गया। रविवार सुबह नाले का पानी खेत में भर जाने से गेहूं की पूलियां डूब गईं। कमोबेश ऐसा ही गौरव, जागन और कालीचरन के साथ भी हुआ। उनके खेतों में भी गेहूं सड़ने के कगार पर पहुंच गया है।
खेतों में पानी भर जाने से परेशान चंद्रपाल ने बताया कि नगर पालिका के नाले के पानी का निकास नरऊ तालाब से पहले बंद हो गया है। एनएचएआई ने पिछले साल बाइपास निर्माण कराया था, इसी दौरान नाला बंद हो गया। इसके बाद से ही बाइपास से पहले के किसानों के खेतों में पानी भरा रहता है।
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- नाले का पानी भरने के बारे में जानकारी नहीं है। दो दिन पहले ही नाले की सफाई कराई गई है। बाइपास निर्माण की वजह से नाले का पानी का निकास बंद है। पानी के निकास की व्यवस्था जल निगम को करनी है। इसकी कार्रवाई चल रही है।- हरीश कुमार त्यागी, सफाई निरीक्षक, नगर पालिका परिषद