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जिले में बढ़ा डायरिया का प्रकोप, रोज आ रहे मरीज

Sun, 14 Jun 2015 07:34 PM IST
badaun
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पूरा जिला डायरिया की चपेट में है। स्वास्थ्य विभाग स्थिति पर काबू के लिए ठोस कदम नहीं उठा रहा है। स्थिति लगातार बिगड़ रही है। जिला अस्पताल में रोज डायरिया के 30 से 35 मरीज पहुंच रहे हैं। जिले की 12 सीएचसी और पांच पीएचसी पर भी यही हाल है। संक्रामक रोग नियंत्रण सेल को डेली रिपोर्ट देने में भी सीएचसी और पीएचसी हीलाहवाली कर रहे हैं। निजी अस्पतालों में भी इलाज के लिए काफी संख्या में डायरिया पीड़ित पहुंच रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग स्थिति को नजरअंदाज कर जिले में संक्रामक फैलने का इंतजार कर रहा है।
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किसी गांव से नहीं लिए पानी के सैंपल
बदायूं। डायरिया की बीमारी का मुख्य वजह दूषित जल और गंदगी है। स्वास्थ्य विभाग ने अब तक किसी भी गांव में पानी के सेंपल नहीं लिए हैं। व्यवस्था है कि समय-समय पर संक्रामक बीमारियों के लिहाज से संवेदनशील इलाकों से पानी के सैंपल लेकर इनकी टेस्टिंग होनी चाहिए। यहां स्वास्थ्य विभाग के साथ जल निगम भी लापरवाही बरत रहा है।

ग्रामीण स्वास्थय समितियां कर रहीं खानापूरी
जिले में 1036 ग्राम पंचायतें हैं। हरेक ग्राम पंचायत को साल में दस हजार रुपये दिए जाते हैं। इससे गांवों में साफ-सफाई के साथ संक्रामक रोगों के सीजन में तालाबों में चूना छिड़काव और गांवों की नालियों में कीटनाशक दवाओं के छिड़काव की व्यवस्था होती है। यह रकम ग्रामीण स्वास्थ्य समितियों के खातों में भेजी जाती है। स्वास्थ्य समितियां इस रकम का सही ढंग से इस्तेमाल नहीं कर रहीं।
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- डायरिया के कारण
. पेट के कीड़ों या वैक्टीरिया के संक्रमण से।
. वायरल संक्रमण के कारण।
. आस-पास सफाई ठीक से न होने से।
. शरीर में पानी की कमी होने से।
. किसी दवाई के रिएक्शन से।
. पाचन शक्ति कमजोर होने से।
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- डायरिया के लक्षण
. जल्दी-जल्दी दस्त होना।
. पेट में तेज दर्द होना।
. पेट में मरोड़ पडना।
. उल्टी आना।
. बुखार होना।
. कमजोरी महसूस होना।
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- डायरिया का इलाज
. डायरिया के उपचार में आहार का बड़ा महत्व है।
. केले, चावल, सेब का मुरब्बा और टोस्ट का मिश्रण जिसे ब्राट कहते हैं, इसके इस्तेमाल से राहत मिलती है।
. केले और चावल आंतों की गति को नियंत्रित करने और दस्त को बांधने में सहायता करते हैं।
. सेब और केले में मौजूद पेक्टिन दस्त कम करता है और डायरिया को रोकता है।
. पर्याप्त मात्रा में तरल और अन्य पोषक पदार्थ लेना आवश्यक है।
. डायरिया गंभीर हो रहा हो तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।
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सीएचसी, पीएचसी नहीं दे रहे रिपोर्ट
जिले में सीएचसी और पीएचसी पर भी रोज औसतन डायरिया के 20-25 पीड़ित पहुंच रहे हैं। सीएचसी और पीएचसी से संक्रामक रोग नियंत्रण सेल के लिए रिपोर्ट नहीं भेजी जा रही है। बार-बार रिमाइंडर के बाद भी स्थिति में सुधार नहीं हो रहा है। ऐसे में संक्रामक रोग नियंत्रण सेल आंकड़े भी नहीं जुटा पा रहा है।

अब तक जिले में एक ही स्थान पर डायरिया के कई केस मिलने का कोई मामला सामने नहीं आया है। स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में है। निगरानी की जा रही है। अगर कहीं पर डायरिया फैलने की खबर मिलती है तो स्वास्थ्य विभाग की टीम को मौके पर भेजा जाता है। - डॉ. कौशल गुप्ता, प्रभारी संक्रामक रोग नियंत्रण सेल
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