बदायूं। करीब आठ सौ करोड़ रुपये की ठगी करने के मामले में जेल भेजे गए भाजपा से निष्कासित शशिकांत मौर्य और सूर्यकांत मौर्य की संपत्तियों की जांच शुरू कर दी गई है। उन्होंने तीन चिटफंड कंपनियां खोलकर एजेंटों के जरिये बदायूं, बरेली, पीलीभीत सहित अन्य जनपदों के करीब 35 हजारों लोगों से निवेश के नाम पर यह रकम जुटाई थी।
दो दिन पहले गिरफ्तारी के बाद करीब आठ घंटे की पूछताछ में पुलिस को दोनों भाइयों की संपत्तियाें के संबंध में कई सबूत मिलने की बात सामने आई है। इससे पता चला है कि आरोपियों ने ठगी की रकम से जमीनें और प्लॉट खरीदे हैं। बरेली, पीलीभीत और उत्तराखंड के शहरों में रकम निवेश की गई है। कहां-कहां कितनी संपत्तियां खरीदी गई हैं, इस महत्वपूर्ण जानकारी से पुलिस की जांच के बाद ही पर्दा उठेगा।
बदायूं के अशोक सम्राट नगर निवासी सगे भाई शशिकांत मौर्य और सूर्यकांत मौर्य ने शहर के जालंधरी सराय में अमर ज्योति कंपनी और अमर ज्योति यूनिवर्स निधि लिमिटेड नाम से चिटफंड कंपनियां खोली थीं। इनके साथ दोनों ने बरेली के कटरा चांद खां में मकान बनवाकर वहां पर अमर ज्योति रुहेलखंड और अमर ज्योति हायर परचेज नाम से चिटफंड कंपनियां खोली थीं।
इन कंपनियों में सौ से अधिक एजेंटों के जरिये हजारों की संख्या में निवेशकों से धनराशि निवेश कराई और पिछले साल कंपनियां बंद कर दीं, लेकिन किसी का एक भी रुपये दोनों आरोपियों ने वापस नहीं किया था। इसके बाद दोनों आरोपियों सहित अन्य लोगों के विरुद्ध कोतवाली में पांच और बरेली के बारादरी में चार मुकदमे धोखाधड़ी के दर्ज किए गए थे।
सोमवार की शाम लखनऊ से गिरफ्तारी करने के बाद एसटीएफ गौतमबुद्ध नगर और कोतवाली पुलिस शशिकांत मौर्य और सूर्यकांत को बदायूं लेकर आई और कोतवाली में करीब आठ घंटे तक पूछताछ की। दोनों से ठगी की रकम कहां निवेश की गई, इस संबंध में गहन पूछताछ की गई। पुलिस सूत्रों ने बताया कि ठगी की रकम से कहां-कहां कितनी जमीनें और प्लॉट खरीदे गए हैं, इसकी गहन छानबीन पुलिस की एक टीम कर रही है।
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आरोपियों ने ठगी की रकम से कहां-कहां कितनी संपत्तियां खरीदी हैं और डेढ़ साल में आरोपी कहां-कहां ठहरे थे, इसकी विस्तृत जांच कराई जा रही है। जांच के बाद ही संपत्तियों के बारे में सही जानकारी मिल सकेगी। - अभिषेक कुमार सिंह, एसपी सिटी