फसलें खेत में जलाने से कम हुए मृदा के पोषक तत्व
विश्व मृदा स्वास्थ्य दिवस पर गोष्ठी में किसानों को दी गई जानकारी
कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को बताया कि फसल की पैदावार बढ़ाने के लिए मृदा (मिट्टी) में आर्गेनिक कार्बन की मात्रा 0.75 होनी चाहिए। फसलों के अवशेष जब खेत में जला दिए जाते हैं तो आग की लपटों में आर्गेनिक कार्बन के तत्व भी झुलस जाते हैं। ऐसे में किसानों को फसल के अवशेष जलाने की वजाय खेत में सड़ाने का काम करना चाहिए। इससे मिट्टी में आर्गेनिक कार्बन की मात्रा में वृद्धि होने के साथ पर्यावरण और जलवायु को भी फायदा होगा। किसानों की जिज्ञासा का शांत करने के लिए वैज्ञानिकों ने मृदा परीक्षण भी करके दिखाया। परीक्षण के दौरान मिट्टी में आर्गेनिक कार्बन की मात्रा 0.75 की बजाय 0.2 से 0.4 तक आई।
आर्गेनिक कार्बन की मात्रा में कमी को फसल उत्पादन में सवसे ज्यादा नुकसानदायक बताते हुए केंद्र के प्रोग्राम कोआर्डीनेटर डॉ. आरपी सिंह ने कहा कि किसानों ने अपना ढर्रा नहीं बदला तो आने वाले दिनों में मिट्टी के अंदर पोषक तत्वों की कमी के साथ आर्गेनिक कार्बन की मात्रा सिफर हो जाएगी। कृषि वैज्ञानिकों में डॉ. फूल सिंह, डॉ. संजय कुमार, डॉ. यशपाल सिंह, श्रीपाल सिंह, आनंद प्रकाश, विमल कुमार ने किसानों के साथ खेत-खलिहान से जुड़ी अहम जानकारियां शेयर कीं। क्षेत्रीय कृषि अनुसंधान केंद्र के प्रभारी डॉ. एसबी सिंह ने उन्नतशील बीजों से अवगत कराया।
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पांच सौ किसानों को बांटे मृदा स्वास्थ्य कार्ड
उझानी। कृषि विज्ञान केंद्र परिसर में विश्व मृदा स्वास्थ्य दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि भाजपा के क्षेत्रीय अध्यक्ष बीएल वर्मा और विशिष्ट अतिथि भवानी सिंह ने किसानों को वैज्ञानिक सलाह का अनुसरण करने की वकालत की। उन्होंने प्रोग्राम कोआर्डीनेटर डॉ. आरपी सिंह की मौजूदगी में बदायूं जिले के पांच सौ किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरित किए। स्वास्थ्य कार्ड में मृदा के पोषक तत्वों की जानकारियां समायोजित हैं।
मिट्टी का परीक्षण कराएं किसान
विश्व मृदा दिवस पर बरेली रोड में श्यामनगर स्थित टाटा किसान संसार में किसान गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें किसानों को मिट्टी के स्वास्थ्य के बारे में बताया गया। साथ ही मिट्टी के अनुसार ही खेती करने की जानकारी दी गई।
गोष्ठी में पहुंचे उप कृषि निदेशक (प्रसार) आरपी चौधरी और जिला कृषि अधिकारी आरके सिंह ने किसानों के साथ मृदा स्वास्थ्य के बारे में विस्तृत चर्चा की। उन्होंने किसानों को बताया कि किसान अपने खेतों की मिट्टी की जांच अनिवार्य रूप से कराएं। इसके साथ ही ढेंचा और सन की खेती करके खेतों में उसे पलटकर जुताई ीकराने की सलाह दी, जिससे मिट्टी की उर्वरकता को बनाए रखा जा सके। इस दौरान आलोक प्रकाश, सलीम असगर, राजीव चौहान, अब्बास, आदेश, राममूर्ति सिंह, अशोक, रमेशचंद्र, महेशचंद्र, पुष्पक प्रकाश, टाटा केमिकल्स के विमल सिसौदिया और टाटा संसार के संचालक नवीन प्रकाश सहित तमाम किसान मौजूद रहे।