खाद्य सुरक्षा विभाग ने पिछले साल अभियान चलाकर किए रजिस्ट्रेशन
12 लाख से ऊपर की व्यावसायिक फर्मों के हुए लाइसेंस जारी
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन अपनी नई भूमिका में नजर आने के लिए गत वर्षों के प्रयासों को भुनाने में जुटेगा। शासन के निर्देश पर गत वर्ष शुरू हुई खाद्य पदार्थों के कार्यों से जुड़ी फर्म और प्रतिष्ठान के लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन के क्रम में अबतक तस्वीर साफ हो चुकी है। प्रशासन की इस संस्था ने अबतक दो श्रेणियां बनाकर रजिस्ट्रेशन और लाइसेंस जारी किए हैं। इसमें 12 लाख सालाना की टर्न ओवर वाले 310 व्यावसाइयों को लाइसेंस जारी किया गया है तो इससे कम का व्यापार करने वाले 300 व्यापारियों का रजिस्ट्रेशन कर उनको अपने रडार पर लिया है। हालांकि इसमें लाइसेंस धारकों से दो से पांच हजार रुपये तक टैक्स भी बांधा गया है और रजिस्ट्रेशन में 100 रुपये मात्र का वार्षिक शुल्क वसूली का भी प्रावधान है। निगरानी और लाभ दोनों ओर से प्रशासन मजबूत हो गया है। इस प्रक्रिया में सूचीबद्ध हुए व्यावसायिक प्रतिष्ठान अब पूरी तरह से उनके अधीन रहेंगे। किसी भी गड़बड़ी पर लाइसेंस खारिज होने से लेकर अन्य दंडात्मक कार्रवाई और वसूली का प्रावधान अंकुश के तौर पर काम आएगा। खाद्य सुरक्षा एवं औषघि प्रशासन, अभिहित अधिकारी, संजय शर्मा ने कहा कि जनता को मानकों से परिपूर्ण खाद्य सामग्री मिले। मिलावट करने वाले दंडित हों। इस मंशा को लेकर शासन के निर्देश पर गत वर्ष चलाए गए अभियान में 610 को विशेष श्रेणी में रखा गया है। इनका रजिस्ट्रेशन किया गया है तो लाइसेंस भी जारी किए हैं। लाइसेंस की संख्या 310 तक पहुंच गई है।