कछला घाट पर जलस्तर बढ़ने से दुकानों तक पहुंचा पानी। संवाद
बदायूं। केंद्रीय जल आयोग ने कछला में गंगा नदी के खतरे का निशान पुनरीक्षित किया है। अब खतरे के निशान में 40 सेंटीमीटर की बढ़ोतरी की गई है। पिछले कई वर्षों के बाढ़ के स्तर को देखते हुए यह बदलाव किया गया है। अब खतरे का निशान समुद्रतल से 162 मीटर से बढ़कर 162.40 मीटर कर दिया गया है। साथ ही चेतावनी के निशान में भी बढ़ोतरी की गई है।
दशकों बाद केंद्रीय जल आयोग ने खतरे के निशान को पुनरीक्षित किया है। गंगा में बाढ़ की वर्तमान स्थिति का सिंचाई विभाग के अभियंताओं, केंद्रीय जल आयोग की टीम, सहसवान, सदर व दातागंज के एसडीएम ने आंकलन किया। टीम ने बाढ़ के दौरान गंगा नदी के प्रभावित स्थलों का निरीक्षण किया। टीम ने अपनी रिपोर्ट केंद्रीय जल आयोग को दी। केंद्रीय जल आयोग ने रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद में खतरे के निशान व चेतावनी स्तर में परिवर्तन के निर्देश दिए। इसको लेकर पिछले दिनों डीएम की अध्यक्षता में बैठक हुई। उसमें तय हुआ कि गंगा नदी के कछला पुल पर वर्तमान खतरे का स्तर 162.00 मीटर से बढ़ाकर 162.40 मीटर कर दिया जाय। इसके अलावा चेतावनी स्तर 161.00 से बढ़ाकर 161.80 मीटर कर दिया जाए। इस आधार पर अब बाढ़ का मापन होगा।
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60 सेंटीमीटर से एक मीटर तक बढ़ाया जा सका है निशान
- केंद्रीय जल आयोग के अनुसार खतरे के निशान से चेतावनी स्तर 0.60 मीटर से 1.00 मीटर नीचे रखा जा सकता है। यह देखा जाएगा कि बाढ़ का स्तर फसलों व प्रोपर्टी को नुकसान न करे।
वर्जन-
- केंद्रीय जल आयोग के निर्देशों के क्रम में डीएम के आदेश पर कछला पुल का खतरे का निशान 162.00 की जगह 162.40 मीटर और चेतावनी का निशान 161.00 की जगह 161.80 मीटर किया गया है। - उमेश चंद्र, अधिशासी अभियंता बाढ़ खंड