उझानी। खेलेगा तो बढ़ेगा इंडिया...जब भी कहीं खेलकूद प्रतियोगिताएं हों, यही स्लोगन सिर्फ वॉल पेंटिंग में नजर आता है, पर हकीकत कुछ और ही है। उझानी में एमजीपी कॉलेज का मैदान है। खेलने के लिए मैदान की हालत तो सुधरी, लेकिन विभाग ने प्रतिभाओं को चमकने का मौका देने के लिए न तो कोच की तैनाती की, न संसाधन ही मुहैया कराए। अगर खेलकूद में इलाके की प्रतिभाओं को आगे बढ़ना है तो उन्हें बदायूं स्टेडियम या फिर कहीं बाहर जाना पड़ता है।
एथलीट समेत क्रिकेट, फुटबॉल, तीरंदाजी ही नहीं, बल्कि कई और खेलों को बढ़ावा देने के लिए केंद्र और राज्य सरकार लाखों रुपये खर्च कर रही है। उझानी को देख लीजिए। महात्मा गांधी पालिका (एमजीपी) कॉलेज के मैदान की दशा सुधारने के लिए नगर पालिका परिषद और केंद्रीय राज्यमंत्री बीएल वर्मा की सांसद निधि से काफी हद तक निर्माण कार्य समेत बैठने से लेकर खिलाड़ियों के लिए ड्रेसिंग रूम का निर्माण करा दिया। प्रकाश व्यवस्था से लेकर पेयजल के इंतजाम पालिका ने करा दिए, लेकिन खेल प्रतिभाओं को सिखाने के लिए कोच या फिर ट्रेनर की तैनाती नहीं की गई।
दरअसल, खेल प्रतिभाओं को दक्षता तभी हासिल होती है, जब कोई उन्हें सिखाने वाला हो। इसकी जिम्मेदारी खेल विभाग की है। पालिका से जुड़े कॉलेज के इस मैदान में अन्य स्कूल-कॉलेज और खेलकूद संस्थाओं की देखरेख में छात्र और छात्राओं समेत कस्बे के युवक बिना किसी सरकारी ट्रेनर और कोच के तैयारी करते नजर आते हैं।
तीरंदाजी, ताइक्वांडो, फुटबॉल, वालीबॉल और क्रिकेट खेलने के लिए भी प्रतिभाओं के पास बेहतर संसाधन नहीं हैं। खेल विभाग या फिर प्रादेशिक युवा कल्याण विभाग की ओर से उन्हें जरूरी संसाधन मुहैया करा दिए जाएं तो प्रशिक्षण प्राप्त कर इलाके की प्रतिभाएं प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश में भी अपना लोहा मनवा सकती हैं। उन्हें तैयारी करने के लिए इलाके से बाहर भी जाकर उन्हें निजी खेलकूद कोचिंग सेंटरों में आर्थिक नुकसान भी नहीं उठाना पड़ेगा।
यहां खेलकर चमके क्रिकेटर रिंकू सिंह, कशिश ने भी बढ़ाया मान
संसाधनों के अभाव में कॉलेज के मैदान के साथ कई ऐसे आयोजन जुड़े हैं, जो इस बात के साक्षी हैं कि अगर निजी खेल संस्थाओं की तरह विभागीय स्तर से सुविधा मुहैया कराई जाएं तो तस्वीर कुछ और ही नजर आती। करीब एक दशक पहले क्रिकेट टूर्नामेंट में अलीगढ़ के रिंकू सिंह ने जलवा दिखाया था। वह इन दिनों भारतीय क्रिकेट टीम का हिस्सा हैं। इसी तरह नगर निवासी कशिश खान ने इसी मैदान पर तीरंदाजी में दमखम दिखाना शुरू किया। वह राष्ट्रीय स्तर पर चमकी तो आईटीबीपी में नौकरी पा गईं।
तीरंदाजी के संसाधन मुहैया कराए सरकार
तीरंदाजी में मैंने स्टेट लेवल पर प्रतिभाग किया है। भदवार कॉलेज की ओर से काफी हद तक सुविधा मुहैया कराई, लेकिन उपकरण इतने महंगे होते हैं कि उन्हें निजी स्तर से खरीदना काफी मुश्किल है। सरकार को ब्लॉक और कस्बा स्तर पर संसाधन उपलब्ध कराने चाहिए।- अदिति सागर, तीरंदाज
ताइक्वांडो में सरकारी कोच की दरकार
ताइक्वांडो के प्रति छात्र और छात्राओं में जागरूकता बढ़ी है। निजी स्कूल और कॉलेज में प्राइवेट कोच प्रशिक्षण भी देते हैं। संसाधन सरकारी स्तर से नहीं मिल पाते। ताइक्वांडो को भी बढ़ावा देने के लिए खेल विभाग के जरिये सरकार को संसाधन मुहैया कराने चाहिए।- गौरी कश्यप, खिलाड़ी
एथलीट सिर्फ कॉलेजों में पीटीआई तक सिमटे
एथलीट को बढ़ावा देने के लिए सरकार की ओर से दावे किए जाते रहे हैं। कॉलेज में पढ़ाई के दौरान पीटीआई ही देखरेख करते रहे हैं, जबकि एथलीट में चमकने के अवसर अधिक हैं। सरकार को बेहतर इंतजाम करने चाहिए।- प्रशांत पाल, एथलीट
प्रतिभाओं को आगे बढ़ने के लिए संसाधन आवश्यक
मैंने क्रिकेट, कबड्डी, फुटबॉल, वालीबॉल समेत कई खेलों में प्रतिभाग किया है। खेल कोई हो, प्रतिभाओं को चमकने के लिए संसाधन मुहैया कराने होंगे। खेलकूद के संसाधनों पर खर्चा अधिक होता है। हरेक खिलाड़ी खुद खर्चा नहीं उठा सकता। संसाधन उपलब्ध कराने से खेलों को बढ़ावा मिलेगा। - योगेश प्रताप सिंह, खिलाड़ी
युवा कल्याण विभाग का अभी वजीरगंज में स्टेडियम संचालित हो रहा है। उझानी में खेलकूद का शेड्यूल आने पर ही प्रतियोगिता कराई जाती है। भविष्य में कोच के लिए प्रस्ताव बना तो शासन को भेजा जाएगा। - हरी प्रेम, जिला युवा कल्याण अधिकारी
उझानी में एमजीपी कॉलेज का मैदान। संवाद
उझानी में एमजीपी कॉलेज का मैदान। संवाद
उझानी में एमजीपी कॉलेज का मैदान। संवाद
उझानी में एमजीपी कॉलेज का मैदान। संवाद